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Monday, 5 September 2022

सपने में खुद पर हमला होते हुए देखना | Sapne Me Khud Par Hamla Hote Dekhna

कैसे हो दोस्तों ? सपनों की रहस्यमई दुनिया में आप सभी का स्वागत है । आज हम आपको इस आर्टिकल में सपने में पिता देखने का मतलब क्या होता है यह बताएंगे |दोस्तो अगर सपने में खुद पर हमला होते हुए देखना तो इसका क्या मतलब होता है 

इसके बारे में बताएंगे रात को सोते समय प्रत्येक आदमी कोई न कोई सपना देखता है सबपन शास्त्र के अनुसार महज संयोग नही होता ये सपने फ्यूचर से जुड़े अच्छे और बुरे संकेतों के बारे में बताते है 

इसीलिए सपनो को बिना सोचे समझे नजरंदाज नही करना चाहिए बल्कि हमे ये पता करना चाहिए कि ये सपना हमे क्या संकेत देना चाहता है यदि आप सपने में किसी का मर्डर कर देते है तो पहले तो हमें मर्डर या हत्या के बारे में सोचना ही नही चाहिए ये कानून जुर्म है

Sapne Me Khud Par Hamla Hote Dekhna



जीवन लेने बाला बी भगवान है और देने बल बी भगवान है हमे कोई बी हक नही बनता हम किसी की हत्या कर दे या उसके जीवन का अंत कर दे यदि आप सपने में किसी की हत्या कर देते है तो इसका अर्थ ये है कि आप अपनी पुरानी लत को छोड़ रहे है 

ओर बहुत जल्दी छोड़ बी देंगे अब ये आप पर निर्बेर करता की ब लत अछि है या बुरी अगर ये बुरी आदत है तो छोड़ दे ये सपना आपके लिए शुभ है  ये सपना ये बी संकेत देता है कि आपके लिए नए रास्ते खुल रहे है आपके रिस्तो में जो दरार आ गयी है वो बी धिरे धिरे समाप्त हो जाएगी


सपने में खुद को रोते हुए देखना


हम सभी सपने देखते है ओर इसमे कोई बड़ी बात नही है सपना देखना एक समान्य प्रक्रिया है जो हर किसी के साथ हो सकती है
लेकिन सपनो को लेकर कुछ बिशेष बातें बताई गई है जिसे कुछ लोग जानते है तो कुछ लोग नही जानते कहा जाता है कि हम बही सपना देखते है जिसके बारे में हम ज्यादा सोचते है लेकिन इन मे से कुछ सपने सच हो जाते है 

तो कुछ नही हो पाते सबी सपनो का कोई न कोई मतलब होता है आपको सुनकर हैरानी हो रही होगी सबपन शाष्त्र की माने तो सपने देखना मात्र एक सयोंग नही है बल्कि इनसे फ्यूचर के संकेतों को जाना जा सकता है क्या होता है 

इन सपनो का मतलब शाष्त्र के अनुसार जितने बी सपने देखे जाते है उन सभी सपनो का संकेत कुछ न कुछ होता है इसलिए सपनो को नजरअंदाज न करने की सलाह दी जाती है वहीं पर कुछ ऐसे बी सपने होते है जो हमे कई चिजो के बारे में संकेत देते है 

सबपन शाष्त्रो कुछ ऐसे सपनो के बारे में बताया गया है जो कई बार सच भी हो जाते है ओर इसका सीदा सम्बंद हमारे जीवन से जुड़ा होता है इसीलिए आज हम आपको विशेष सपने के बारे में बताने जा रहे है जिसका अर्थ विशेष होता है सपने में खुद को रोता देखना बेहद शुभ माना गया है हमारे आने बाले जीवन के लिए शुभ संकेत होता है 

ऐसा माना जाता है जो ब्यक्ति सपने में समान्य अबस्था में रोता है उसे उसके जीवन मे बड़ी उपलब्धिया पयार्प्त होती है आवर उसकी जिंदगी आराम से कटती है

जो वयक्ति सपने में खुद को रोते हुए आंसू गिराते देखता है तो इसका सीदा मतलब होता है उसके खुद के दुखों का गिरना सपने में सामनये अबस्था से तेज तेज रोना चीला कर रोना शुभ नही होता इसलिए अगर आप सपने ने सामनये अबस्था में रोते है तो घबराने की जुर्रत नही है आपको इस बात के लिए खुस हो जाना चाहिए कि आपके दुखो का अंत होने जा रहा है


सपने में अनजान जगह को देखना


यदि आप सपने में अनजान जगह को देखते है या अनजान ब्यक्ति को देखते है तो इसका क्या अर्थ होता है बास्तब में हमारे मन मे किसी चीज को लेकर किचकिचाहत नही होती है या किसी परिस्थिति में अपने आप को असमर्थ  महसूस कर रहे होते है

उस बक्त  बी आपको ऐसे सपने आते है जिसमे आप अपने आप को अनजानी जगह या अनजान लोगों के बीच पाते है जीने आप नही जानते है सपने में अनजान जगह को देखना अच्छा सपना माना गया है ये सपना बताता है आपकी जिंदगी आने बाले समय मे अच्छा बदलाब होगा लेकिन ये तबी होगा जब ये सपना बार बार आयगा

Saturday, 27 August 2022

नीरज चोपड़ा के माता-पिता कौन हैं? जानिए उनके परिवार के बारे में सब - jankari

भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा जुलाई के अंत में आगामी टोक्यो ओलंपिक में चर्चा में रहेंगे।  वह देश के लिए ट्रैक और फील्ड ओलंपिक पदक लाने के लंबे इंतजार को खत्म करने के लिए आशा की किरण हैं।


 वर्तमान में प्रदर्शन के आधार पर दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं, चोपड़ा पोलैंड में 2016 IAAF U20 विश्व चैंपियनशिप में अपने शानदार विश्व जूनियर रिकॉर्ड के बाद वैश्विक सुर्खियों में आए।  वह तब से न केवल राष्ट्रीय भाला फेंक दृश्य पर शासन कर रहा है, बल्कि अपने अनुभवी अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों के लिए खुद को एक घातक खतरा साबित कर चुका है।


 23 वर्षीय किक ने अपने 2021 सीज़न की शुरुआत अपने यूरोपीय दौरे से की थी।  स्टार ने लिस्बन और कार्लस्टेड जीपी में स्वर्ण पदक जीते।  चोपड़ा ने कुर्टेन खेलों में पोडियम फिनिश करने की अपनी आदत को जारी रखा, कुछ शीर्ष फेंकने वालों के खिलाफ कांस्य पदक जीता।

नीरज चोपड़ा


 जबकि भारतीय आइकन का उज्ज्वल भविष्य होना निश्चित है, यहाँ उनके पंखों के नीचे की हवा पर एक नज़र डालते हैं: उनके माता-पिता।

स्पोर्टिंग स्टार नीरज चोपड़ा के पीछे ताकत के स्तंभ



नीरज चोपड़ा आज अंतरराष्ट्रीय भाला फेंक सर्किट में शीर्ष सितारों में से एक हो सकते हैं, लेकिन एथलीट की शुरुआत मामूली थी।
 हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव में जन्मे चोपड़ा अपने माता-पिता सतीश और सरोज देवी के नेतृत्व वाले एक किसान परिवार से आते हैं।  

उनके चाचा, भीमसेन चोपड़ा के अनुसार, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता उनके विशाल संयुक्त परिवार के सबसे बड़े पुत्र हैं।  नीरज चोपड़ा ने 2018 में एनएनआईएस स्पोर्ट्स न्यूज को बताया, "शुरुआत में खेल से संबंधित कुछ भी नहीं था क्योंकि गांव और मेरे परिवार में खेल का माहौल नहीं था।"
 

चोपड़ा के मुताबिक, वह फिटनेस के लिए स्टेडियम गए थे और उन्होंने अपने सीनियर्स और दोस्तों को फेंकते देखा और यहीं से उनका सफर शुरू हुआ।  जब फेंकने वाले ने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता, तो उसके परिवार ने उसके गांव में मिठाई बांटी।  “मुझे अच्छा लगता है कि मैं अपने परिवार के लिए, अपने देश के लिए कुछ करने में सक्षम हूं।  यह किसी के लिए भी बहुत गर्व की बात है, ”चोपड़ा ने 2018 के साक्षात्कार में जोड़ा।
 

उनके पिता सतीश चोपड़ा ने अपने बेटे को आशीर्वाद देने के लिए सभी को धन्यवाद दिया।  "मैं उन्हें देश के बेटे के रूप में मानता हूं।  हमने उन्हें जन्म दिया है और उनका पालन-पोषण किया है लेकिन देश जो उनके साथ है, उनकी इच्छाएं और आशीर्वाद हमसे अधिक हैं।  हमें उन पर गर्व है और पूरे देश को उन पर गर्व है।  हम सभी को धन्यवाद देते हैं, ”उन्होंने कहा।

नीरज चोपड़ा अब दुनिया के सबसे शानदार खेल मंच पर प्रतिस्पर्धा करेंगे, जिसमें हर भारतीय की देश के पहले एथलेटिक्स ओलंपिक पदक जीतने की उम्मीद है।

Tuesday, 9 August 2022

अहोई अष्टमी कथा क्या है - ahoi ashtami ki katha

हिंदू पंचाग की कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को ahoi ashtami ki katha अहोई अष्टमी मनाए जाने का प्रावधान है । इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपनी संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं । 

इस त्योहार से जुड़ी कई कथाएं है लेकिन एक कथा लोक प्रचलित है । के प्राचीन काल में एक साहुकार था , जिसके सात बेटे और सात बहुएं थी । इस साहुकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी । 

ahoi ashtami ki katha

दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गई । साहुकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी उस स्थान पर स्याही ( साही ) अपने बेटों से साथ रहती थी । 

मिट्टी काटते हुए ग़लती से साहूकार की बेटी की खुरपी के से चोट से स्याही का एक बच्चा मर गया । स्याही इस पर क्रोधित होकर बोली मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी ।


स्याही के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक एक कर विनती करती रही कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें । सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो गई । 

इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे हुए वे सात दिन बाद मर जाते थे । सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा । पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी । के पंडति के कहेनुसार वह सुरही गाय की सेवा करने लगी 

सुरही सेवा से प्रसन्न हुई और उसे स्याही के पास ले गई । रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगी , 

तभी अचानक साहुकार की छोटी बहू की नज़र एक ओर गई , उसने देखा कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है , यह देखकर उसने सांप को मार डाला ।


के उसी वक्त गरुण पंखनी प्रकट हुई और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगा कि छोटी बहु ने उसके बच्चे के मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है । 

छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है । गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याही के पास पहुंचा देती है । ↑ वहां स्याही छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहु होने का अशीर्वाद देती है । 


स्याही के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है । अहोई का अर्थ एक प्रकार से यह भी होता है अनहोनी से बचाना जैसे साहुकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था ।

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