Tuesday, 11 October 2022

मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है पढ़िए यह रोचक कहानी

भगवान् मपुंगू , सबसे बड़े देवता ने धरती और आकाश बनाया , दो मनुष्य एक पुरुष और एक स्त्री बनाई ; जिन्हें दिमाग दिया । किंतु अब तक इन दोनों मनुष्यों को उन्होंने हृदय नहीं दिया था । भगवान् मपुंगू के चार बच्चे थे । 

चंद्र , सूर्य , अंधकार और बरसात । उन्होंने चारों को एक साथ बुलाया और कहा , मैं अब निवृत्त होना चाहता हूँ । अतः मनुष्य अब कभी मुझे देख न सकेंगे । मैं अपनी जगह पर एक हृदय को धरती पर भेजूंगा । किंतु जाने से पहले मैं जानना चाहता हूँ 


मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है पढ़िए यह रोचक कहानी


कि तुम लोग क्या - क्या करोगे ? बरसात ने कहा , मैं मूसलाधार पानी बरसाऊँगा और हर चीज को पानी में डुबो दूँगा । नहीं । भगवान् मपुंगू ने कहा , ऐसा हरगिज नहीं करना चाहिए । इन दोनों की तरफ देखो । उन्होंने स्त्री और पुरुष की ओर इशारा किया , क्या ये लोग पानी के भीतर रह सकेंगे ? तुम सूर्य से इस काम में मदद लो ।


जब तुम जरूरत भर का पानी बरसा दो तब सूर्य को काम करने देना । वह अपनी गरमी से उसे सुखा देगा । और तुम किस तरह काम करोगे ? भगवान् मपुंगू ने सूर्य मैं चाहता हूँ , मैं इतना तेज चमकूँ कि मेरी गरमी से सब से पूछा । जल जाएँ ! उनके दूसरे पुत्र सूर्य ने कहा नहीं । भगवान् मपुंगू ने कहा , 


यह होगा तो फिर मेरे बनाए इन मनुष्यों को भोजन कैसे मिलेगा ? देखो , जब अपनी गरमी से सबकुछ झुलसाने लगोगे तब बरसात को मौका देना । वह पानी बरसाकर राहत देगा और फल अनाज उगने में सहायता करेगा । और तुम , अंधकार ! तुम्हारे कार्यक्रम की क्या रूपरेखा है ? भगवान् ने अंधकार से पूछा । मैं हमेशा - हमेशा के लिए राज्य करना चाहता हूँ । 


अंधकार ने उत्तर दिया । दयालु बनो । भगवान् ने सौम्य स्वर में कहा , क्या तुम मेरी इस अद्भुत रचना को खत्म कर देना चाहते हो ? क्या तुम चाहते हो कि शेर , चीते , सर्प सब अँधेरे में घूमते रहें और मेरी बनाई दुनिया न देख सकें ? चाँद को भी कुछ करने का मौका दो । * उसे धरती पर चमकने दो । जब वह चौथाई रह जाए तब पुनः तुम अपना साम्राज्य फैला सकते हो । 


मुझे काफी देर हो गई है । अब मुझे जाना चाहिए । और भगवान् मपुंगू अंतर्धान हो गए । कुछ समय के बाद हृदय एक पतली सी झिल्ली से आवृत्त उनके पास आया । वह रो रहा था । उसने सूर्य , चंद्रमा , अंधकार और बरसात से पूछा , हमारे पिता भगवान् मपुंगू कहाँ हैं ? पिताजी चले गए ।


उन्होंने कहा , हम जानते भी नहीं हैं कि वे कहाँ गए ! हाय ! मेरी कितनी इच्छा थी कि उनके साथ उनमें लीन हो जाऊँ । किंतु ... खैर , जब तक वे नहीं मिलते , मैं आदमी में प्रवेश करूंगा और उसके माध्यम से पीढ़ी - दर - पीढ़ी ईश्वर को खोजूँगा । हृदय ने कहा । और यही हुआ । मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है । 


शिक्षा : ईश्वर हर किसी में है ।

Monday, 10 October 2022

यह माता मंदिर जिसे कांगड़ा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है इसके इतिहास को विस्तार से जानिए !!

श्री वज्रेश्वरी माता मंदिर जिसे कांगड़ा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है , एक हिंदू मंदिर है जो भारत के हिमाचल प्रदेश में , शहर कांगड़ा में स्थित दुर्गा का एक रूप वज्रेश्वरी देवी को समर्पित है । माता व्रजेश्वरी देवी मंदिर को नगर कोट की देवी व कांगड़ा देवी के नाम से भी जाना जाता है 


कांगड़ा देवी मंदिर



और इसलिए इस मंदिर को नगर कोट धाम भी कहा जाता है । ब्रजेश्वरी देवी हिमाचल प्रदेश का सर्वाधिक भव्य मंदिर है । मंदिर के सुनहरे कलश के दर्शन दूर से ही होते हैं । वर्तमान मे उत्तर भारत की नौ देवियों की यात्रा मे माँ कांगड़ा देवी शामिल हैं । अन्य देवियाँ वैष्णो देवी से लेकर सहारनपुर की शाकंभरी देवी तक है 


स्थान 


वज्रेश्वरी मंदिर भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के कांगड़ा शहर में स्थित है और यह 11 साल का है कांगड़ा के निकटतम रेलवे स्टेशन से किमी दूर । कांगड़ा किला पास ही स्थित है ।


महापुरूष 


पौराणिक कथाओं के अनुसार , देवी सती के पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में उन्हे न बुलाने पर उन्होने अपना और भगवान शिव का अपमान समझा और उसी हवन कुण्ड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिये थे । तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण्ड के चक्कर लगा रहे थे । 


उसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था और उनके ऊग धरती पर जगह - जगह गिरे । जहां उनके शरीर के अंग गिरे वहां एक शक्तिपीठ बन गया । उसमें से सती की बायां वक्षस्थल इस स्थान पर गिरा था जिसे माँ ब्रजेश्वरी या कांगड़ा माई के नाम से पूजा जाता है ।


नगरकोट वाली माता का इतिहास


कहा जाता है कि मूल मंदिर महाभारत के समय पौराणिक पांडवों द्वारा बनाया गया था । किंवदंती कहती है कि एक दिन पांडवों ने देवी दुर्गा को अपने सपने में देखा था जिसमें उन्होंने उन्हें बताया था कि वह नगरकोट गांव में स्थित है और यदि वे खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन्हें उस क्षेत्र में उनके लिए मंदिर बनाना चाहिए अन्यथा वे नष्ट हो जाएंगे । उसी रात उन्होंने नगरकोट गाँव में उसके लिए एक शानदार मंदिर बनवाया । 1905 में मंदिर को एक शक्तिशाली भूकंप से नष्ट कर दिया गया था और बाद में सरकार द्वारा इसका पुनर्निर्माण किया गया था ।


मंदिर की संरचना 


मुख्य द्वार के प्रवेश द्वार में एक नागरखाना या ड्रम हाउस है और इसे बेसिन किले के प्रवेश द्वार के समान बनाया गया है । मंदिर भी किले की तरह एक पत्थर की दीवार से घिरा हुआ है । मुख्य क्षेत्र के अंदर देवी वज्रेश्वरी पिंडी के रूप में मौजूद हैं । मंदिर में भैरव का एक छोटा मंदिर भी है । मुख्य मंदिर के सामने धायनु भगत की एक मूर्ति भी मौजूद है । उसने अकबर के समय देवी को अपना सिर चढ़ाया था । वर्तमान संरचना में तीन कब्रें हैं , जो अपने आप में अद्वितीय है । 


मंदिर के उत्सव 


जनवरी के दूसरे सप्ताह में आने वाली मकर संक्रांति भी मंदिर में मनाई जाती है । किंवदंती कहती है कि युद्ध में महिषासुर को मारने के बाद , देवी को कुछ चोटें आई थीं । उन चोटों को दूर करने के लिए देवी ने नागरकोट में अपने शरीर पर मक्खन लगाया था । इस प्रकार इस दिन को चिह्नित करने के लिए , देवी की पिंडी को मक्खन से ढका जाता है और मंदिर में एक सप्ताह तक उत्सव मनाया जाता

Friday, 7 October 2022

नीम सिर्फ हमारी त्वचा के लिए नहीं बल्कि पेट के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है इसके बारे में रोचक बातें जानिए

अगर आप खाली पेट नीम की पत्तियों का सेवन करते हैं तो या फिर इन्हें पानी में उबाल कर नमक के साथ खाते हैं तो आपको अपने शरीर से इन बीमारियों को करने में मदद मिल सकती है । भारत को आयुर्वेद की सरजमीं कहा जाता है और यहां पाई जाने वाले ढेर सारी जड़ी - बूटियां किसी न किसी रोग में काम जरूर आती है । 

इन जड़ी - बूटियों में हमारे आस - पास मौजूद ऐसे ढेर सारे पेड़ - पौधे पाए जाते हैं , जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं । इन्हीं में एक है नीम , जो भारत के हर हिस्से में पाया जाता है । इस पेड़ की पत्तियों से लेकर टहनियां भी हमारे बड़े काम आ सकती है । 

नीम


नीम का पेड़ यूं तो अपने ढेर सारे लाभ के लिए जाना जाता है और इसका औषधीय उपयोग लगभग हजारों वर्षों से होता आ रहा है । यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र नीम के पेड़ को " 21 वीं सदी का वृक्ष " घोषित कर चुका है । आप शायद इस बारे में जानते हों लेकिन बता दें कि नीम की पत्तियों का सेवन शरीर की अनेक बीमारियों को दूर कर सकता है । 

जी हां , अगर आप खाली पेट नीम की पत्तियों का सेवन करते हैं तो या फिर इन्हें पानी उबाल कर नमक के साथ खाते हैं तो आपको अपने शरीर से इन बीमारियों को करने में मदद मिल सकती है । आइए जानते हैं कौन सी हैं ये बीमारियां ।


नीम के 10 फायदे


ब्लड शुगर करे कंट्रोल 

खराब जीवनशैली के कारण भारत में लगातार डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है । हालांकि लोग अभी भी घरेलू नुस्खों पर विश्वास करते हैं । इन्हीं घरेलू नुस्खों में से एक है नीम के पत्तों को सुबह खाली पेट चबाना । ऐसा करने से ब्लड शुगर को कंट्रोलकरने में मदद तो मिलेगी ही साथ ही आपका खून भी साफ होगा । एक्सपर्ट बताते हैं कि नीम के पत्तों में azadirachtolide नाम का तत्व होता है , जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में प्रभावी होता है । 


कई संक्रमण को रखता है दूर 

जी हां , नीम का उपयोग एक एंटी बायोटिक के रूप में भी किया जाता है , जो सामान्य प्रकार के संक्रमण को रोकने में उपयुक्त होता है । सुबह नियमित रूप से नीम की पत्तियां चबाने पर आपको मूत्रमार्ग और आंखों के संक्रमण में काफी फायदा मिलता है । इतना ही नहीं नीम पित्त और कफ को कम करने का भी काम करता है । नीम की ब्लड प्यूरीफायर , एंटी बैक्टीरियल , एंटी ऑक्सीडेंट खूबियां इसे एक्जिमा , सोरायसिस जैसे अनेक त्वचा विकारों में फायदेमंद बनाती है । 


पेट के लिए लाभदायक 

नीम सिर्फ हमारी त्वचा के लिए नहीं बल्कि पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है । इसमें मौजूद पित्तनाशक गुण एसिडिटी में बेहद उपयोगी होते हैं और आप सुबह खाली पेट पानी में नीम की पत्तियां उबालकर पीने से कब्ज , पेट दर्द , आंतो में मौजूद कीड़ों को बाहर निकालने में मदद मिलती है ।


बुख़ार को करे कम 

मानसून हो या उसके बाद फैलने वाले डेंगू , मलेरिया नीम के पत्ते सभी में बहुत फायदेमंद माने जाते हैं । इन दोनों स्वास्थ्य स्थितियों में बुखार आता है और नीम बुखार को कम करने की अच्छी दवा है । इसकी पत्तियों में स्थित गेंडनिन नाम का यौगिक मलेरिया के तेज बुखार को कम करने में कारगर साबित हुआ है । 


इम्यूनिटी बढ़ाने में फायदेमंद 

सुबह उठकर खाली पेट नीम की पत्तियां चबाने से आपके शरीर को प्राकृतिक गुण प्राप्त होते हैं , जो शरीर में पहुंचकर रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने का काम करते हैं । अगर आप नियमित रूप से नीम की पत्तियां चबाकर पानी पीते हैं या फिर पानी में उबालकर पत्तियों का सेवन करते हैं तो आपको प्राकृतिक इम्यून बूस्टर प्राप्त होता है ।

Friday, 30 September 2022

रुद्राक्ष - jankari

रुद्राक्ष पेड़ का उत्पाद है जो । एक पवित्र मनके के रूप में जाना जाता है । यह ऋषियों , ज्योतिषियों और अन्य आध्यात्मिक संस्थाओं द्वारा पहने जाने वाले प्रसिद्ध रत्नों में से एक है । 

मनके का उपयोग ज्यादातर छोटे या बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है । यह न केवल हिंदू धर्म बल्कि अन्य धर्मों द्वारा भी पूजा जाता है । इस मनके के वैज्ञानिक और ज्योतिषीय लाभ भी हैं । 

पौराणिक मान्यता है कि रुद्राक्ष का उद्भव भगवान शिव के आंसू से हुआ था । इसे स्वर्ग से पृथ्वी के बीच सेतु माना जाता है । रुद्राक्ष ज्यादातर इंडोनेशिया , नेपाल और भारत में पाया जाता है । 

दुनिया में 1 से लेकर 21 मुखी तक रुद्राक्ष उपलब्ध हैं । प्रत्येक मनके का एक अलग उद्देश्य और उपाय है । उन्हें मुख के अनुसार विभाजित किया जाता है जिसे मुखी भी कहा जाता है । 

रुद्राक्ष ऊर्जा से भरा हुआ एक शक्तिशाली आभूषण है , कमजोर दिल वाले उसे पहन नहीं सकते हैं । हालांकि , यह व्यापक रूप से स्वास्थ्य मन और आत्मा के लिए जाना जाता है । इसे पहने से पहले आपको किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह लेनी चाहिए । 

वह आपकी जन्मकुंडली की जांच करेगा और आपको बताएगा कि आपको इसे कैसे और कब पहनना चाहिए । ध्यान दें कि इसे अपने मन से पहनने की गलती न करें यह नकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है 


रुद्राक्ष पहनने के नियम


रुद्राक्ष पहनने के लिए आपको पैसे से खरीदने की जरूरत है , किसी और के पैसे से खरीदा गया रुद्राक्ष आपको लाभ नहीं देगा । 

किसी भी प्रकास का रुद्राक्ष पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से इसे अभिमंत्रित जरूर करा लें और जन्मकुंडली के अनुसार रुद्राक्ष को धारण करें ताकि यह मनका आपको प्रभावी लाभ दे सके । 

इस रुद्राक्ष को ग्रहण करने से पहले , किसी शुभ दिन आपको एक पूजा करवानी होगी और मंत्रोच्चार करते हैं इसे पहनना होगा । 

रुद्राक्ष को गंदे हाथों से ना छुए वरना यह अपवित्र हो सकता है । 

रुद्राक्ष धारी को माँस और मदिरा का सेवन करना त्याग देना चाहिए । 

रुद्राक्ष को धारण करने से पहले हमेशा तेल से साफ करके पहनना चाहिए । वैसे तो बाजार में कई तरह के रुद्राक्ष उपलब्ध हैं लेकिन आपको जिस मुखी रुद्राक्ष की जरूरत है उसकी पहचान करके ही धारण करें । ० 

ररुद्राक्षधारियों को नियमित रूप से भगवान शिव की प्रार्थना करनी चाहिए ।


रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान


जिन लोगों ने जीवन में पाप किया है और मुक्ति चाहते हैं तो उनके लिए यह मनका फायदेमंद है । 

यह मनका आपकी जन्मकुंडली में क्रूर ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद करता है । 

यह पहनने वाले को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है । 

यह पहनने वाले को तनाव और हाईब्लडप्रेशर को कम करने में मदद करता है । 

यह रुद्राक्षधारी को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है । 

यह चेचक जैसे सभी प्रकार के त्वचा रोगों को ठीक करने में मदद करता है । 

यह मिर्गी और जहर के घावों को ठीक करने में मदद करता है । 

यह पहनने वाले के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना देता है । 

खासतौर पर खानाबदोश लोगों के लिए , यह निपटान , स्थिरता और सहायता प्रदान करता है । राशि चक्र पर रुद्राक्ष लाभ

राशि के अनुसार रुद्राक्ष


राशि अनुसार रुद्राक्ष पहनने से इसका प्रभाव बढ़ जाता है । यह आपके जीवन पर लाभकारी असर डालता है । यह पहनने वाले को सकारात्मकता देता है और गुस्सा भी कम करता है । 

पौराणिक रूप से रुद्राक्ष को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है , क्योंकि यह सभी प्रकार के ग्रहों का इलाज करने और अप्रत्याशित घटनाओं को संभालने में मदद करता है । यह एक शक्तिशाली उपाय है जिसने बहुत से लोगों को राशि चक्र , ज्योतिषीय महत्व और स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का इलाज करने में मदद की है ।

Sunday, 25 September 2022

कभी भी अपने घर के भेद किसी दूसरे को नहीं बताने चाहिए भेद बताने से भारी हानि को झेलना पड़ सकता है जरूर पढ़िए कहानी - jankari

एक नगर में देवशक्ति नाम का राजा रहता था । उसके पुत्र के पेट में किसी तरह सांप चला गया । सांप राजा के पुत्र के पेट में ही अपना बिल बनाकर रहने लगा । उसके कारण उसका शरीर दिन प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था । बहुत उपचार करने के बाद भी उसका स्वस्थ नहीं सुधर रहा था । यह देख राजपुत्र अपना राज्य छोड़ कर किसी दूसरे राज्य में चला गया और वहां के एक मंदिर में भिखारी की तरह रहने लगा । उस राज्य के राजा की दो पुत्रियां थी । वे दोनों जब भी अपने पिता को प्रणाम करती तो प्रणाम कहते हुए पहली पुत्री कहती है महाराज ! आपकी जय हो । 


There lived a king named Devshakti in a city.  Somehow a snake got into his son's stomach.  The snake started making its bill in the stomach of the king's son.  Because of that his body was getting weaker day by day.  Even after many treatments, his health was not improving.  Seeing this, the prince left his kingdom and went to another state and started living like a beggar in a temple there.  The king of that kingdom had two daughters.  Whenever both of them bowed down to their father, the first daughter while saying obeisance says, 'Maharaj!  Hail thee .  


कभी भी अपने घर के भेद किसी दूसरे को नहीं बताने चाहिए भेद बताने से भारी हानि को झेलना पड़ सकता है जरूर पढ़िए कहानी !!


आपकी कृपया से इस राज्य में सुख हैं । दूसरी लड़की प्रणाम करते समय कहती है - महाराज आपके कर्मों का फल भगवन आपको दे । दूसरी पुत्री का प्रणाम सुनकर राजा को गुस्सा आ जाता था । एक दिन राजा ने क्रोध में आकर मंत्री से कहा इस कटु वचन बोलने वाली लड़की को किसी गरीब परदेशी के साथ भेज दो । मंत्रियों ने उस लड़की का विवाह मदिंर में रहने वाले उसी राजपुत्र से करवा दिया जिसके पेट में सांप रहता था ।


There is happiness in this kingdom by your kindly.  Another girl says while bowing - Lord, may God give you the fruits of your actions.  The king got angry after hearing the second daughter's salutation.  One day the king got angry and said to the minister, send the girl who spoke this bitter word with some poor foreigner.  The ministers got that girl married to the same prince who lived in the temple, who had a snake in his stomach.


वह लड़की अपने पतिधर्म के अनुसार राजपुत्र की बहुत सेवा करती थी । दोनों ने उस राज्य को छोड़ दिया थोड़ी ही दूर जाने पर वह आराम करने के लिए एक तालाब के किनारे ठहरे । वह लड़की राजपुत्र को तालाब के किनारे छोड़ कर खाने पिने का सामान लेने लिए गयी । जब वह वापिस लोटी तो उसने दूर से देखा कि उसका पति एक बाम्बी के पास सोया हुआ है और उसके मुहं से एक काला सांप निकल कर बाम्बी से निकले सांप के साथ बाते कर रहा था ।


The girl used to serve the king a lot according to her husband's religion.  Both of them left that kingdom, after going a short distance, they stayed on the bank of a pond to rest.  The girl left Rajputra on the bank of the pond and went to get food and drink.  When she returned, she saw from afar that her husband was sleeping beside a Bambi and a black snake came out of his mouth and was talking with the snake that came out of Bambi.


बाम्बी से निकला सांप कहता है- अरे दुष्ट ! तू क्यों इस सुन्दर राजकुमार के जीवन को बर्बाद कर रहे हो । पेट वाला सांप कहता है - तू भी तो इस बिल में स्वर्ण कलश को दूषित कर रहे हो । बाम्बी वाला सांप कहता है - तू समझता है कि तुझे कोई राजकुमार के पेट में मार नहीं सकता ? कोई भी व्यक्ति उबली हुयी राई देकर तुझे मार सकता है । पेट वाला सांप बोला - तुझे भी तो तेरे बिल में गरम तेल डालकर मार सकता है । 


The snake that came out of Bambi says - Oh wicked!  Why are you ruining the life of this handsome prince?  The stomach snake says - You are also polluting the golden urn in this bill.  Bambi's snake says - You understand that no one can kill you in the stomach of a prince?  Anyone can kill you by giving boiled mustard seeds.  Stomach snake said - You too can kill you by pouring hot oil in your bill.  ,


इस तरह बात चित करते हुए वह एक दूसरे के भेद खोल देते हैं । वह लड़की उनकी सुनी हुयी बातों को जानकर उन्हें उसी प्रकार मार देती है । परिणामस्वरूप उसके पति का स्वास्थ्य भी ठीक हो जाता है और स्वर्ण कलश मिलने से वे धनवान भी बन जाते हैं । दोनों राजकुमार के देश चले जाते है और अपनी सारी कहानी बतातें हैं राजकुमार के माता पिता उनका स्वागत करते हैं ।


While talking like this, they open the differences between each other.  Knowing what they heard, the girl kills them in the same way.  As a result, her husband's health also gets better and by getting the golden urn, he also becomes wealthy.  The two go to the prince's country and narrate their entire story, the prince's parents welcome them.


कहानी की शिक्षा

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कभी भी अपने घर के भेद किसी दूसरे को नहीं बताने चाहिए | भेद बताने से भारी हानि को झेलना पड़ सकता है ।


Lesson of the story


This story teaches that one should never tell the secrets of one's house to anyone else.  Discrimination can result in heavy loss.



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Friday, 23 September 2022

गणेश जी की कहानी | गणेश जी महाराज की कहानी

18 पुराणों में देवी देवताओं को आदर्श बताया गया है । पुराणों में देवी देवताओं की कहानी के साथ पुण्य और पाप का प्रतिफल बताया गया है ताकि सुनने वाले पाप - पुण्य का फेर समझ सकें । वेद व्यास लिखित 18 पुराणों में से एक है , गणेश पुराण | गणेश पुराण में पांच खंड हैं । गणेश पुराण में गणेश जी की लीलाओं का बखान है । हम आपको में गणेश पुराण की सम्पूर्ण कथा इस पीडीऍफ़ में दे रहे है

भारतीय जीवन - धारा में जिन ग्रन्थों का महत्वपूर्ण स्थान है उनमें पुराण भक्ति ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं । पुराण साहित्य भारतीय जीवन और साहित्य की अक्षुण्ण निध हैं । 

इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएँ मलती हैं । कर्मकांड से ज्ञान की ओर आते भारतीय मानस चंतन के बाद भक्ति की अवरल धारा प्रवाहित हुई है । 

वकास की इसी प्रक्रया में बहुदेववाद और निर्गुण ब्रह्म की स्वरूपात्मक व्याख्या से धीरे - धीरे मानस अवतारवाद या सगुण भक्ति की ओर प्रेरित हुआ । अठारह पुराणों में अलग -अलग देवी - देवताओं को केन्द्र मानकर पाप और पुण्य कर्म , और अकर्म की गाथाएँ कही गई हैं । आज के निरन्तर द्वन्द्व के युग में पुराणों का पठन मनुष्य को उस द्वन्द्व से मुक्ति दिलाने में एक निश्चित दिशा दे सकता है और मानवता के मूल्यों की स्थापना में एक सफल प्रयास सद्ध हो सकता है । 

इसी उद्देश्य को सामने रखकर पाठकों की रुच के अनुसार सरल सहज और भाषा में पुराण साहित्य की श्रृंखला में यह पुस्तक गणेश पुराण प्रस्तुत है । 1 धर्म और अधर्म , , पुराण साहित्य भारतीय साहित्य और जीवन की अक्षुण्य निध है । इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएं मलती हैं । 


निरन्तर द्वन्द्व और निरन्तर द्वन्द्व से मुक्ति का प्रयास मनुष्य की संस्कृति का मूल आधार है । पुराण हमें आधार देते हैं । इसी उद्देश्य को लेकर पाठकों की रुच के अनुसार सरल , सहज भाषा में प्रस्तुत पुराण- साहित्य की श्रृंखला में उप पुराण ' गणेश पुराण ' ।

कैसे हुई गणेश पुराण की शुरुआत


गणेश पुराण भगवान् श्री गजानन के अनंत चरित्र को दर्शाता है । इसको सुनाने और सुनने वाले सभी का कल्याण होता है और श्री गणेश की कृपा बनी रहती है । श्री गणेश प्रथम पूज्य तो हैं ही , साथ ही वघ्नेश्वर भी कहे जाते हैं क्यों क श्री गणेश अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर कर देते हैं । गणेश पुराण श्री गणेश जी की महिमाओं से जुड़ी बहुत सी बातें बताता है ।

गणेश पुराण की उत्पत्ति के बारे में जानने से पहले मह र्ष भृगु द्वारा राजा सोमकान्त को गणेश पुराण सुनाये जाने के बारे में जानना चाहिए । राजा सोमकान्त सौराष्ट्र की राजधानी देवनगर के राजा था । वह वेदों , शस्त्र वद्या आदि के ज्ञान से संपन्न था । 

उसने अपने पराक्रम के बल पर अनेक देशों पर वजय प्राप्त की थी । उसने अपनी प्रजा का पालन पुत्र की भांति कया था । उसकी पत्नी सुधर्मा पतिव्रत धर्म का पालन करने वाली अति सुंदर तथा गुणवती स्त्री थी । 

राजा भी पत्नीव्रत धर्म का पालन करने वाला अति उत्तम पुरुष था । जितना उत्तम राजा था उतना ही उत्तम उसका पुत्र था , जो सभी तरह की चयाओं में निपुण और प्रजा के भले की सोचने वाला था । राजा का जीवन पूर्ण सुखी और सम्माननीय था । परन्तु युवावस्था के अंत में राजा को कुष्ठ रोग हो गया था । 

बहुत उपचार करवाने पर भी कोई फायदा नहीं तो राजा निराश हो गया और राजपाट छोड़कर वन में जाने की ठान ली । अपने मंत्रियों से पुत्र को राज्य चलने में मदद करने को कहकर राजा ने शुभ मुहूर्त देखकर पुत्र का राज्या भषेक कया और फर वन के लए चल पड़ा । सोमकान्त के पीछे उसका पुत्र सभी मंत्रीगण और प्रजाजन भी चल दिये । 

जिन्हें राजा ने राज्य की सीमा पर पहुंचकर समझाकर वापस लौटाया । पुत्र के कहने पर राजा ने 2 सेवक अपने साथ में ले लये ।  वन में पहुंचकर राजा , उसकी पत्नी और सेवक एक साफ़ और समतल जगह देखकर वश्राम के लए रुके , जहाँ पर उन्हें मह र्ष भृगु का पुत्र च्यवन मला । 

च्यवन से परिचय के पश्चात् च्यवन ने राजा के रोग की बात मह र्ष भृगु से जाकर कही । मह र्ष के कहने पर च्यवन राजा उसकी पत्नी और सेवकों को आश्रम ले गया । जहाँ उन्होंने स्नानादि करके भोजन कर रात्रि वश्राम कया । अगले दिन सुबह उठकर नित्यकर्मों से निवृत होकर राजा मह र्ष भृगु के सामने उपस्थित हुआ । 

महर्ष भृगु ने राजा को उसके रोग का कारण उसके पूर्वजन्म के पाप बतायें । जब राजा ने पूर्वजन्म के पाप के बारे में जानना की इच्छा जताई तो श्री भृगु ने उन्हें पूर्वजन्म में की गयी निर्दोषों की हत्याओं लूटपाट आदि के बारे में बताया । 

मह र्ष ने उन्हें यह भी बताया क कैसे जीवन के अंतिम समय में राजा सोमकान्त ने भगवान श्री गणेश्वर के खंडहर हो चुके मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया जिसके कारण राजा को पुण्य की प्राप्ति हुई । पूर्वजन्म में मृत्यु के बाद जब राजा को यमदूतों ने यमराज के सामने पेश कया तब यमराज के ये पूछने पर क राजा पाप और पुण्य में से कसे पहले भोगना चाहता है , 

राजा ने पुण्य भोगने की बात कही थी । इसी कारण इस जन्म में अब तक राजा बनकर सोमकान्त उसी पुण्य को भोग रहा था परन्तु अब पुण्य का समय ख़त्म हो गया था और पाप भोगने का समय शुरू हो चूका था इस लए सोमकान्त कुष्ठ रोग से पी इत हो गया था । राजा सोमकान्त के रोग से मुक्त होने का उपाय पूछने पर मह र्ष ने उन्हें गणेश पुराण सुनने के लए कहा । 

परन्तु राजा ने तो कभी गणेश पुराण के बारे में कुछ भी नहीं सुना था इस लए राजा ने महर्ष भृगु से निवेदन कया क मह र्ष से ज्यादा ज्ञानी और उत्तम कोई दूसरा व्यक्ति नहीं हो सकता जो क • गणेश पुराण सुना सके , अतः स्वयं मह र्ष ही राजा को गणेश पुराण सुना दें । मह र्ष ने राजा की बात मान ली और राजा पर अ भमंत्रित जल छिड़का जिससे राजा को एक छींक आयी और उसकी नाक से एक काला और अजीब सा दिखने वाला पुरुष बहार निकला जो बड़ा होता गया और उसे देखकर सभी डर गये । 

यह पुरुष पाप था और मह र्ष के द्वारा राजा पर डाले गये जल के कारण राजा के शरीर से बहार आ गया था । मह र्ष के कहने पर पाप अपनी भूख शांत करने के लए निकट स्थित एक आम के पेड़ के पास गया और जैसे ही आम खाने के लए पेड़ को हुआ तो पूरा पेड़ जलकर भस्म हो गया । इसके घटना के बाद पाप गायब हो गया । राजा को अपने रोग में आराम मल गया था । 

महर्ष ने आम के पेड़ के वापस पहले जैसा न होने तक गणेश पुराण सुनाने की बात कही । राजा के मन में प्रश्न उठा क आ खर गणेश पुराण की रचना कसने की और उन्होंने मह र्ष से यह पूछा । मह र्ष भृगु ने तब राजा को बताना शुरू कया ।

" महर्ष वेदव्यास जी ने जब वेदों में लखी सभी बातों को चार अलग - अलग वेदों में आसान भाषा में बदल दिया तब सभी वद्वानों में उनकी बड़ी तारीफ हुई । इस बात से वेदव्यास जी को स्वयं पर गर्व हो गया । उसी गर्व के चलते अब वह पुराणों की रचना करना चाहते थे , 

इस लिए उन्होंने पुराणों की रचना शुरू की । परन्तु अपने अ भमान के चलते उन्होंने भगवान श्री गणेश की आराधना कये बिना ही पुराणों की रचना शुरू कर दी और गणेश जी को आराधना तो हर शुभ कार्य के पहले अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए थी क्यों क वे तो प्रथम पूज्य हैं । 

वेदव्यास जी से हुई इस गलती का दंड तो उन्हें मलना ही था । पुराणों की रचना करते समय वेदव्यास जी बहुत सी महत्वपूर्ण बातों के वषय में भूलने लगे और इससे पुराणों की रचना में वघ्न होने लगा । वेदव्यास जी काफी निराश हुए और उन्होंने भगवान ब्रह्मा जी से इसके हेतु मलना तय कया और वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे । 

उन्होंने सारी बात ब्रह्मा जी को बताई । तब ब्रह्मा जी ने उन्हें बताया के भगवान श्री गणेश कसी को भी अभमानी नहीं रहने देते हैं , वे तो सर्वज्ञ हैं । वेदव्यास जी को अपनी भूल का आभास हो गया था और वे इसका पश ्चाताप करने का उपाय जानने के इच्छुक हुए तब ब्रह्मा जी ने उन्हें भगवान श्री गणेश की पूजा करने के लए कहा और उन्हें पूर्ण पूजा वध के बारे में बताया । 

पूजा वध जानने के बाद वेदव्यास जी गणेश जी के बारे में और ज्यादा जानने को उत्सुक हुए तब भगवान ब्रह्मा जी ने उन्हें श्री गणेश जी की महिमाओं के बारे में कई कथाएं कही उन्हीं सब गणपति महिमाओं को संक लत कर मह र्ष वेदव्यास जी ने गणेश पुराण की रचना की थी । ·

Thursday, 22 September 2022

शकुन

शकुन समाज में प्रचलित एक अवधारणा है जिसमें यह माना जाता है कि कुछ विशेष प्रकार की परिघटनाएँ हमारे भविष्य का संकेत देती हैं । अनुकूल भविष्यवाणी करने वाले शकुन को शुभ शकुन तथा प्रतिकूल भविष्यवाणी करने वाले शकुनों को अपशकुन कहा जाता है । 

न केवल भारत में अपितु विश्व भर में ये शकुन प्रचलित हैं । भारतीय संस्कृति में शकुन का संकेत वेदों पुराणों व धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है । महाभारत व रामायण जैसे महाकाव्यों में भी कई जगह शकुनों की बात कही गई है । ज्योतिष में भी शकुनों पर विशेष विचार किया जाता है । प्रश्न कुंडली की विवेचना में शकुनों का महत्व विशेष है । प्राचीन काल में ये शकुन लोकवार्ता के द्वारा ही पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचते रहे हैं । वैज्ञानिक दृष्टि से इन शकुनों को बहुधा अंधविश्वास ही माना जाता हैं । 

शुभ शकुनों में पूछे गये प्रश्न सफल व अपशकुनों में पूछे गये प्रश्न असफल होते देखे गये हैं । शकुन पृथ्वी से आकाश से स्वप्नों से व शरीर के अंगों से संबंधित हो सकते हैं । किसी भी कार्य के वक्त घटित होने वाले प्राकृतिक व अप्राकृतिक तथ्य अच्छे व बुरे फल की भविष्यवाणी करने में सक्षम होते है । 

शुभ शकुन ब्राह्मण घोड़ा हाथी न्योला बाज मोर । दूध फल फूल व वेद ध्वनि का सोर । अन्न सिंहासन जल कलश पशु एक बधन्त । न्योला चापा मछली और अग्नि प्रज्वलंत । छाता वैश्या पगड़ी अंजन ऐना शस्त्र । कन्या रत्न स्त्री धोबी धोया वस्त्र । घृत मिट्टी अस्त्र शहद मदिरा वस्त्र श्वेत । गोरोचन सरसों अमिष गन्ना खज्जन भेद | बिन रोदन मुर्दा मिले पालकी भरदुल गीत । ध्वज अकुंश बकरा पडे सम्मुख अपना गीत । 

बालक संग स्त्री मिले नौ बेटा बैल सफेद । साधु सुधा सुरतर - पड़े सम्मुख चारों वेद । कूड़ा से भरी टोकरी जो सम्मुख पड़ंत । पाछे घट खाली पड़े निश्चय काज बनंत ।। प्रिय वाणी कानों पड़े सम्मुख वाहन भार । कह कवि ये शुभ शकुन यात्रा चलती बार । अर्थात् ब्राह्मण घोड़ा हाथी न्योला बाज मोर दूध दही फल फूल कमल वेदध्वनि अन्न सिंहासन जल से भरा कलश बंधा हुआ 

एक पशु न्योला चापा ( चाहा पक्ष ) मछली प्रज्वलित अग्नि छाता वैश्या पनाली अंजन ऐना शस्त्र रत्न स्त्री कन्या धुले हुए वस्त्र सहित धोबी घी मिट्टी सरसों मांस गन्ना खज्जन पक्ष रोदन रहित मुर्दा पालकी भारद्वाज पक्षी ध्वजा अंकुश बकरा अपना प्रिय मित्र बच्चे के सहित स्त्री गाय या गोह के सहित बछड़ा सफेद बैल साधु अमृत कल्पवृक्ष चारों वेद शहद शराब गोरोचन आदि में से कुछ भी सम्मुख पड़े या कूड़े से भरी टोकरी प्रिय वाणी या सामान से लदा वाहन यदि यात्रा के वक्त सम्मुख पड़ जाए तो निश्चय ही इच्छा पूर्ति का संकेत करते खाली घड़ा पीठ पीछे हो तो अच्छा है ।

 ये शुभ शकुन हैं । नीलकण्ठ छिक्कर - पिक्कर वानर कौवी भालु । जै कुकर दाएं पड़े तो सिद्ध होय सब काजु । अर्थात् नीलकण्ठ छिक्कर नामक विशेष मृग पिक्कर पक्षी कौवी ( स्त्री संज्ञक ) भालू व कुत्ता यदि दाएं हाथ पर पड़े तो कार्य सिद्ध होता है । 

मृग बाएं ते दाहिने जो आवे तत्काल । बाएं गर्दभ रेकंजा सिद्धि होय सब काज । अर्थात् यदि हिरण बायीं तरफ से रास्ता काटकर दायीं तरफ आ जाए या बायीं तरफ गधा बोलना प्रारंभ कर दे तो शुभ शकुन है ।

खड़ा कोबरा सूकरा जाहक कछुआ गोह । ये शब्द कानों पड़े निश्चय कारज होय । पर दर्शन हो जाएं तो महाअशुभ होय । अतिहि कु शकुन जानिये काट सके ना कोय । अर्थात् यदि खरगोश सर्प सूअर जाहक पशु कछुआ व गोह के शब्द कानों में पड़े तो अत्यंत शुभ शकुन समझें । 

परंतु यदि ये प्रत्यक्ष सामने पड़ जाएं तो महा अशुभ हैं । बानर भालु दर्शन भले नाम के सुनते हानि । कह कवि विचार के तब आगे करौ पदान । अर्थात् यदि वानर भालू यात्रा आरंभ वक्त आगे जाए तो उत्तम शकुन है परंतु यदि इनका नाम कानों में पड़े तो अपशकुन का द्योतक है । 

अपशकुनुन विचार दांए गर्दभ शब्द हो सम्मुख काला धान्य । टूटी खाट आगे मिले तो बहुत हानि । कूकूर लोटे भुम्म पर अथवा मारे कान । पांच भैंस सम्मुख पड़ें निश्चय होवे धन । एक अजाः नौ स्त्री बिल्ली दो लड़न्त । छह कुत्ता आगे पड़ें नहीं बात में तंत । तीन गाय दो बानिया एक बछड़ा एक शूद्र । हाथी सात सम्मुख निश्चय बिगड़े बुद्धि । भैंसा पर बैठा हुआ मनुष्य सम्मुख होय । निश्चय हानि होयेगी बचा सके ना कोय । 

जननी का तिरस्कार होय या हो अकाल वृष्टि । क्षत्री चार सम्मुख निश्चय महाअनिष्ट | तीन विप्र बैरागिया संन्यासी केश खुलंत । भगवा व स्त्री सम्मुख पड़े निश्चय कारण अंत । बंध्या रजः रजस्वला भूसा हड्डी चामं । अंधा बहरा कूबड़ा विधवा लगड़ा पांव । ईंधन लक्कड़ उन्मादिया भैंसा दो लड़ंत । 

गुंड मट्ठा कीचड़ पड़े सम्मुख छींक हुवंत । हिजड़ा विष्ठा तेल जो मालिश तेल मनुष्य । अंग भंग नंगा पतित रोगी पूरा सुस्त । गंजा भिजे वस्त्र सों चर्बी शत्रु सांप । नमक औषधि गिरगिरा कुटंबी झगड़े आप । कटु बचन सम्मुख पड़े जौ यात्रा चलती बार । कह कवि हानि महा बिगड़े सारे काज । 

अर्थात् यदि यात्रा के समय गधा दायीं तरफ बोले या कोई सामने से टूटी खाट लाता हुआ मिले कारज भंग होता है । यदि कुत्ता भूमि पर लेटे या कान फड़फड़ाये पांच भैंस सामने आये एक बकरी नौ स्त्री दो बिल्ली लड़ती हुई छः कुत्ते तीन गाय दो वैश्य एक बैल एक शूद्र सात हाथी या भैंसे पर बैठा हुआ व्यक्ति यदि सम्मुख पड़े तो अपशकुन का सूचक है । 

यात्रा में चलते समय जननी का तिरस्कार करे या अकाल वर्षा हो चार क्षत्रिय तीन ब्राह्मण बैरागी सन्यासी खुले केशों वाला गेरूरा वस्त्र धारण करने वाला सम्मुख पड़ जाए तो अपशकुन है । 

इसी प्रकार बांझ औरत स्त्री का रज रजोवती स्त्री भूसा हड्डी चमड़ा अंधा बहरा कूबड़ा विधवा स्त्री जलाने वाली लकड़ी उपला पागल गुड़ मट्ठा कीचड़ सामने आये दो भैंसे लड़ते हुए नपुसंक विष्ठा तेल मालिश किये आदमी अंग भंग नंगा नीच पुरुष दीर्घ रोगी गंजा भीगे वस्त्रों में चर्बी सर्प शत्रु नमक औषधि गिरगिट सामने आ जाए अपने ही कुटुंबी सामने लड़ते हों सामने कोई छींक दे या यात्रा के वक्त अप्रिय बचन सुनाई पड़ें तो अपशकुन का सूचक है । काक स्पर्श व छिपकली के गिरने को अशुभ समझा गया है ।

 यदि कौआ अचानक शोरगुल करे या किसी के सिर पर बैठे तो आर्थिक हानि दर्शाता है । यदि स्त्री के सिर पर बैठे तो पति को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है । 

संध्या के समय मुर्गों की ध्वनियां महामारी दर्शाती हैं । जब मछलियां जल की सतह पर छलांग मारें मेढक टर्र - टर्र करे बिल्ली भूमि खोदे चीटियां अपने अंडों को स्थानांतरित करें सांपों का जोड़ा व पशु आकाश की ओर देखे पालतू पशु बाहर जाने से घबराएं तो तुरंत ही वर्षा होती है । ये वर्षा के लिए शुभ शकुन है । 

यदि रात्रि में दीपकीट दिखाई दे कीड़े या सरीसृप घास के ऊपर बैठें तो भी तत्काल वर्षा होती है । यदि वर्षा ऋतु के दौरान सायंकाल में गीदड़ों की चिल्लाहट सुनाई दे तो बिल्कुल वर्षा नहीं होती । मांसभक्षी पशु - पक्षी का दिखाई देना अशुभ व शाकाहारी पशु पक्षी प्रायः शुभ शकुन का संकेत देते हैं ।

ज्योतिष में शकुनों अपशकुनों का विशेष विचार प्रश्न आदि में किया जाता है । साथ ही साथ मेदिनीय ज्योतिष में भी शकुन अपना विशेष महत्व रखते हैं - वर्षा होगी या नहीं होगी कम होगी या अधिक होगी इस प्रकार की भविष्य वाणियां भी शकुनों के आधार पर की जाती हैं कुछ उदाहरण निम्न हैं यदि आसमान बादलों से घिरा हो व पालतू कुत्ता घर से बाहर न जाए तो वर्षा का सूचक है । 

यदि आसमान में चील 400 फुट की ऊंचाई पर उड़ रही हो तो भी वर्षा होने वाली होती है । यदि मकड़ी घर के बाहर जाला बनाए तो वर्षा ऋतु जाने का सूचक है । मेढकों की टर्रराहट वर्षा का संकेत है । मोर का नृत्य तथा शोर भी वर्षा का सूचक है ।

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