Friday, 4 November 2022

Dev Uthani Ekadashi 2022: देवउठनी एकादशी के दिन क्या करें और क्या नहीं

Dev Uthani Ekadashi 2022 सभी 24 एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी मानी जाती है । इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी , देव प्रबोधिनी एकादशी और डिठवन एकादशी के नाम भी जाना जाता है । ऐसे में जगत के पालनहार के जागते ही 4 महीनों से रुके हुए सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर से से शुरू हो जाएंगे । धार्मिक मान्यता है कि सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली इस एकादशी का व्रत करने वालों को स्वर्ग और बैकुंठ की प्राप्ति होती है । हालांकि इस दिन कुछ बातों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी होता है ।


Dev Uthani Ekadashi 2022



 Dev Uthani Ekadashi 2022 व्रत में क्या करें ?


  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें ।

  • मान्यता के अनुसार , देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक अवश्य जलाना चाहिए ।


  • देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन भी करना चाहिए ।


  • इस दिन निर्जला व्रत रखना चाहिए । 


  • साथ ही देवउठनी एकादशी के दिन किसी गरीब और गाय को भोजन अवश्य कराना चाहिए ।

 

Dev Uthani Ekadashi 2022 को क्या न करें 


  • हिंदू शास्त्रों के अनुसार , एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए ।


  • देवउठनी एकादशी वाले दिन पर किसी अन्य के द्वारा दिया गया भोजन नहीं करना चाहिए ।


  • साथ ही एकादशी पर मन में किसी के प्रति विकार नहीं उत्पन्न करना चाहिए ।


  • देवउठनी एकादशी पर गोभी , पालक , शलजम आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए ।


  • देवउठनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए ।


  • एकादशी वाले दिन पर बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए ।


  • एकादशी वाले दिन पर संयम और सरल जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए । 


  • इस दिन कम से कम बोलने की किसी कोशिश करनी चाहिए । साथ ही भूल से भी किसी को कड़वी बातें नहीं बोलनी चाहिए । 

 

Dev Uthani Ekadashi 2022 उपाय


देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें । ऐसा करने से जगत के पालनहार प्रसन्न होते हैं और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है ।


देवउठनी एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें । ऐसा करने से जीवन में आपको समस्त सुखों की प्राप्ति होगी । स्नान करने के बाद गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें माना जाता है इससे स्वास्थ्य अच्छा होता है ।


Dev Uthani Ekadashi 2022 के दिन पीले रंग का वस्त्र , पीला फल व पीला अनाज भगवान विष्णु को अर्पण करें । बाद में ये सभी चीजें गरीबों व जरूरतमंदों में दान कर दें । मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा आप पर बनी रहेगी 


धन वृद्धि के लिए देवउठनी एकादशी के दिन विष्णु मंदिर में सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं । ध्यान रहे भोग में तुलसी के पत्ते जरूर डालें । इससे भगवान विष्णु जल्दी ही प्रसन्न होते हैं और धन की तिजोरी भरने लगती है ।


कहा जाता है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है । ऐसे में देवउठनी एकादशी के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं । शाम को पेड़ के नीचे दीपक लगाएं । इस उपाय को करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है 


शिव पुराण के अनुसार देवउठनी का महत्व


शिव पुरा के अनुसार दैत्यराज शंखासुर से आंतक से सभी देवी - देवता बहुत परेशान हो चुके थे , तब सभी एक साथ मिलकर भगवान विष्णु और भगवान शंकर के पास इस राक्षस के अंत करने की प्रार्थना करने के लिए उनके समक्ष पहुंचे । फिर भगवान विष्णु और दैत्य शंखासुर के बीच कई दिनों तक भयानक युद्ध चला और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु ने शंखासुर को वध कर दिया था । लंबे समय तक दोनों के बीच चले युद्ध के कारण भगवान विष्णु काफी थक चुके थे । तब वह क्षीरसागर में आकर विश्राम करने लगे और फिर सो गए । इस दौरान सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव ने अपने कंधों पर ले लिया था । चार महीने की योग निद्रा के बाद भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं । भगवान विष्णु के जागने पर भगवान शंकर समेत सभी देवी - देवताओं ने उनकी पूजा की और सृष्टि के संचालन का कार्यभार दोबार से उन्हें सौंप दिया । इस कारण से हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव प्रबोधिनी , देवोत्थान और देवउठनी के नाम से जाना जाता है ।


तुलसी- शालिग्राम विवाह का महत्व


कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह करने का महत्व होता है । इस दिन स्त्रियां एकादशी को भगवान विष्णु के रूप शालिग्राम एवं विष्णुप्रिया तुलसी का विवाह संपन्न करवाती हैं ।


पूर्ण रीति - रिवाज़ से तुलसी वृक्ष से शालिग्राम के फेरे एक सुन्दर मंडप के नीचे किए जाते हैं । विवाह में कई गीत , भजन व तुलसी नामाष्टक सहित विष्णुसहस्त्रनाम के पाठ किए जाने का विधान है । 


शास्त्रों के अनुसार तुलसी- शालिग्राम विवाह कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है , दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है । इसके अलावा तुलसी विवाह विधि - विधान से संपन्न कराने वाले भक्तों को अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । इससे वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है ।


श्री हरि के भोग में तुलसी दल का होना अनिवार्य है , भगवान की माला और चरणों में तुलसी चढ़ाई जाती है ।


माना जाता है कि तुलसी विवाह करने से कन्या दान के समान पुण्य प्राप्त होता है । यदि आपने आज तक कन्यादान नहीं किया हो , तो तुलसी विवाह करके आप इस पुण्य को अर्जित कर सकते हैं ।

Thursday, 20 October 2022

Laughing Buddha को इस दिशा में रखें तो संपत्ति में वृद्धि

धन की पोटली अपने कांधे पर टांगे Laughing Buddha किसी भी घर या ऑफिस के लिए शुभ माने गए हैं । इन्हें रखने से पैसों से जुड़ी हर परेशानी खत्म होने लगती है और कभी पैसों की तंगी नहीं होती । धन की पोटली धन भंडार का प्रतीक है । ऐसे लॉफिंग बुद्धा को घर लेकर आना यानी उनके पीछे - पीछे धन - संपदा को भी आने का रास्ता दिखाना है । 

Laughing Buddha
Laughing Buddha



Laughing Buddha को सुख , प्रचुरता , संतोष और कल्याण का प्रतीक माना जाता है । लाफिंग बुद्धा की मूर्तियों को शुभ माना जाता है और सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य के लिए इन्हें अक्सर घरों , कार्यालयों , होटलों और रेस्तरां में रखा जाता है । दोनों हाथ ऊपर किए हुए Laughing Buddha सौभाग्य का प्रतीक हैं वह खुशहाली लेकर आते हैं . उनकी मूर्ति से विश्वास में बढ़ोतरी होती है । 


Laughing Buddha


धन की पोटली अपने कांधे पर टांगे Laughing Buddha किसी भी घर या ऑफिस के लिए शुभ माने गए हैं । इन्हें रखने से पैसों से जुड़ी हर परेशानी खत्म होने लगती है और कभी पैसों की तंगी नहीं होती । पूर्व , उगते सूरज की दिशा , जहां Laughing Buddha रखा जाना चाहिए । 

इसे परिवार के लिए सौभाग्य का स्थान कहा जाता है । परिवार में सुख - समृद्धि लाने के लिए इस दिशा में मूर्ति स्थापित करें । यदि मूर्ति को दक्षिण - पूर्व दिशा में रखा जाए तो इससे परिवार की संपत्ति में वृद्धि होती है ।

Laughing Buddha के बारे में बहुत सारी बातें प्रचलित हैं । आप उदास रहते हैं , आर्थिक बोझ तले दबे हुए हैं , घर में उदासी जैसी स्थिति बनी रहती है , तो लाफिंग बुद्धा को अपने घर लाकर इन समस्याओं का समाधान पा सकते हैं । 


Laughing Buddha
Laughing Buddha



Laughing Buddha की मूर्ति सुख , संपदा एवं प्रगति का प्रतीक माना जाता है । घर में इसके होने से संपन्नता , सफलता आती है । लाफिंग बुद्धा की मूर्ति सुख , संपदा एवं प्रगति का प्रतीक माना जाता है । घर में इसके होने से संपन्नता , सफलता आती है । 

Laughing Buddha की मूर्ति मकान , व्यापार स्थल , लॉबी या फिर बैठक कक्ष में होनी चाहिए । लेकिन ध्यान रहे , यह जमीन से ढाई फीट ऊपर एवं मुख्य दरवाजे के सामने होनी चाहिए । लाफिंग बुद्धा की मूर्ति मकान , व्यापार स्थल , लॉबी या फिर बैठक कक्ष में होनी चाहिए । लेकिन ध्यान रहे , यह जमीन से ढाई फीट ऊपर एवं मुख्य दरवाजे के सामने होनी चाहिए । 


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बुद्धा के हंसते हुए चेहरे को खुशहाली और संपन्नता का प्रतीक माना गया है । फेंगशुई के नियम के अनुसार लाफिंग बुद्धा को अपने घर में दक्षिण पूर्व दिशा में रखें तो इस दिशा की सकारात्मक उर्जा बढ़ जाती है जो धन औ सुख को आकर्षित करती है । घर में रहने वालों की आमदनी बढ़ती है । नौकरी व्यवसाय आपके विरोधियों से आप परेशान हैं तो इसमें भी यह राहत दिलाता है ।

सनातन धर्म में जहां भगवान विष्णु के कच्छप अवतार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है । वहीं कच्छप यानि कछुए की कई प्रतिमाओं का उपयोग पूराने समय से आज तक हमारे यहां शुभता के लिए किया जाता है । इसी के तहत कछुए का प्रयोग प्राचीन समय से ही वास्तु उपाय के रूप में किया जाता रहा है । प्राचीनतम मंदिरों में हमें असीम शांति अनुभव होती है । 

माना जाता है कि ऐसा कछुआ व्यर्थ की भागदौड़ व अनावश्यक प्रयासों से बचाते हुए यह जीवन की सार्थकता के साथ - साथ सुरक्षा भी देता है । कछुआ एक प्रभावशाली यंत्र है , जिससे वास्तु दोष का निवारण होता है और खुशहाली आती है । वास्तु और फेंगशुई में स्फटिक निर्मित कछुआ घर में रखना ज्यादा असरकारी माना जाता है 

इसे घर में रखने से कामयाबी के साथ - साथ धन - दौलत का भी समावेश होता है । अगर आप काफी समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और कई उपाय करने के बाद भी आपको कोई विकल्प नहीं मिल रहा है तो आप घर में स्फटिक से बना हुआ कछुआ रख सकते है । इसे घर की उत्तर दिशा में रखें और मुंह अंदर की तरफ रहे । यदि आप व्यवसायी हैं , तो अपने प्रतिष्ठान की उत्तर दिशा में वास्तु कछुआ रखें , ऐसा करने से व्यापार में धन लाभ और सफलता मिलती है रुके हुए काम जल्दी होने लगते हैं ।

वहीं पीतल , चांदी , तांबा या अष्ट धातु से बना हुआ कछुआ यानि धातु का कछुआ घर या व्यवसायिक स्थल पर लगाना शुभ माना गया है । इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है व वास्तुदोष भी दूर होता है । घर में धातु का कछुआ रखने से , कई समस्याओं के समाधान में मदद मिलती है । 

कड़ी मेहनत करने के बावजूद भी अगर आपको कैरियर में सफलता नहीं मिल रही है तो आपको अपने घर की उत्तर दिशा में धातु से बना हुआ कछुआ रखना चाहिए । इस दिशा में धातु का कछुआ रखने से घर का वातावरण सकारात्मक रहता है , परिवार के सदस्यों का मूड भी अच्छा रहता है । 

कछुए का प्रयोग प्राचीन समय से ही वास्तु उपाय के रूप में किया जाता रहा है । प्राचीनतम मंदिरों में हमें असीम शांति अनुभव होती है , उसका मुख्य कारण मंदिर के मध्य में कछुए की स्थापना है । कहा जाता है कि इसको जहां भी रखा जाता है , वहां सुख - समृद्धि - शांति आती है । आजकल बहुत से लोग घर में कछुए की प्रतिमा रखते हैं । 

मान्यता है कि कछुए के प्रतीक को घर में रखने से आर्थिक उन्नति होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है , जिससे घर में रहने वाले सदस्यों की सेहत अच्छी रहती है ।

Monday, 17 October 2022

deepawali कब है जानें तिथि शुभ मुहूर्त और लक्ष्मी गणेश पूजन

प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह में अमावस्या तिथि को deepawali का त्योहार मनाया जाता है । पूरे भारत में इस पर्व का अलग ही हर्ष और उल्लास देखने को मिलता है । इस दिन पूरा देश दीये को रोशनी से जगमगा उठता है । हिंदू धर्म में दिवाली को सुख - समृद्धि प्रदान करने वाला त्योहार माना जाता है । धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर पर पधारती हैं और उन्हें धन - धान्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं ।

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साथ ही कहा जाता है कि दिवाली के दिन ही प्रभु श्रीराम लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करके अयोध्या लौटे थे । 14 वर्ष का वनवास पूरा कर भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में लोगों ने पूरे अयोध्या को दीयों को रोशनी से सजा दिया था । तभी से पूरे देश में दिवाली मनाई जाती है । इस दिन लोग दीपक जलाकर खुशियां मनाते हैं ।

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deepawali पर शुभ मुहूर्त कब है  


 इस साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 24 और 25 अक्टूबर दोनों दिन पड़ रही है । लेकिन 25 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल से पहले ही समाप्त हो रही है । वहीं 24 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होगी । 24 अक्टूबर को निशित काल में भी अमावस्या तिथि होगी । इसलिए इस साल 24 अक्टूबर को ही पूरे देश में दीवाली का पर्व मनाया जाएगा ।


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deepawali पर लक्ष्मी - गणेश पूजन विधि


दिवाली पर शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी - गणेश की पूजा विधि पूर्वक की जाती है । पहले कलश को तिलक लगाकर पूजा आरम्भ करें । इसके बाद अपने हाथ में फूल और चावल लेकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का ध्यान करें । ध्यान के पश्चात भगवान श्रीगणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर फूल और अक्षत अर्पण करें । फिर दोनों प्रतिमाओं को चौकी से उठाकर एक थाली में रखें और दूध , दही , शहद , तुलसी और गंगाजल के मिश्रण से स्नान कराएं । इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराकर वापस चौकी पर विराजित कर दें । 

स्नान कराने के उपरांत लक्ष्मी - गणेश की प्रतिमा को टीका लगाएं । माता लक्ष्मी और गणेश जी को हार पहनाएं । इसके बाद लक्ष्मी गणेश जी के सामने बताशे , मिठाइयां फल , पैसे और सोने के आभूषण रखें । फिर पूरा परिवार मिलकर गणेश जी और लक्ष्मी माता की कथा सुनें और फिर मां लक्ष्मी की आरती उतारें ।


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दिवाली पूजा के दौरान क्या करे


deepawali के दिन पूजा क्षेत्र को हमेशा उत्तर - पूर्व दिशा में स्थापित करें और पूजा करते समय परिवार के सभी सदस्यों को उत्तर की ओर मुंह करके बैठना चाहिए ।

  • मुख्य पूजा का दीया देसी घी से भरें ।
  • दीयों की संख्या 11 , 21 , 51 रखें ।
  • दिवाली की रात में अपने घर के दक्षिण - पूर्व कोने में एक सरसों के तेल का दीपक जलाकर रखें । 
  • पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करें , जिन्हें भारतीय परंपरा में विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है ।


deepawali पूजा के दिन क्या न करें 


  • अक्सर लोग इस दिन जुआ खेलते हैं , जबकि ये गलत है । इस दिन जुआ खेलने से बचना चाहिए ।
  • इस दिन शराब पीने और मांसाहारी भोजन लेने से बचें । 
  • दीये को रात भर जलाने के लिए पूजा घर को रात में खाली न छोड़ें ।
  • भगवान गणेश की ऐसी मूर्ति न रखें , जिसकी सूंड दाहिनी ओर हो ।
  • घर के अंदर आतिशबाजी या फुलझड़ी का प्रयोग करें ।

Sunday, 16 October 2022

Hanuman जी को किसका अवतार माना गया है Hanuman जी का असली नाम

राज्याभिषेक के पश्चात श्रीराम ने कौसल राज्य की जनता को एक भारी दावत दी । उस दावत के लिए जो सामग्री चाहिए थी और जिन - जिन प्रबंधों की आवश्यकता थी , उसका सारा आयोजन Hanuman जी ने ही किया था । एक क्षण की भी उन्हें फुरसत नहीं थी । उन्होंने राम के इस प्रबंध को फसल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी ।


Hanuman


सीता ने देखा कि हनुमान परिश्रम कर रहा है । उन पर उनका प्रेम पुत्र - वात्सल्य जैसा था । वहीं प्रथम था , जिसने लंका में उनको ढूंढ निकाला था । उन्होंने हनुमान जी को अपने पास बुलाया और कहा - पुत्र हनुमान ! सुबह से एक क्षण का भी विश्राम किए बिना परिश्रम कर रहे हो । भोजन का समय हो गया है । अतिथियों के सत्कार में कोई त्रुति न आए , इसकी देखभाल की जिम्मेदारी तुम्हीं पर है । इसलिए अच्छा यही होगा कि उनसे पहले तुम भोजन कर लो ।

सीता की बात सुनकर हनुमान जी सीता के पीछे - पीछे रसोई घर में चले गए । सीता ने पत्तल बिछाकर खाना परोसना शुरू कर दिया । जो - जो वह परोसती , हनुमान जी तक्षण ही उसे निगल जाते । यह क्रम थोड़ी देर तक चलता रहा और देखते ही देखते हजारों अतिथियों के लिए पकाई गई भोजन सामग्री समाप्त हो गई । यह देखकर सीता आश्चर्य में डूब गई और दौड़ती हुई राम के पास जाकर उन्हें सब कुछ बता दिया ।


Hanuman


राम ने हंसते हुए कहा- तुमने हनुमान को क्या समझ रखा है ? परमशिव इस रूप में अवतरित हुआ है । उसे कैसे संतुष्ट करना है , यह तुम्हारी शक्ति पर आधारित है । इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता । श्रीराम की बात सुनकर सीता रसोई घर में वापस आईं और हनुमान जी के पीछे खड़ी हो गई । वह मन ही - मन कहने लगीं - परमेश्वर ! मैं जान गई हूं कि तुम कौन हो ? कम -से - कम अब तुम अपनी भूख नहीं त्यागोगे तो हमारी मर्यादा मिट्टी में मिल जाएगी । प्रभु , मेरी रक्षा करो । यह कहकर सीता ने पंघाक्षरी मंत्र का सौ बार पठन किया ।

दूसरे ही क्षण हनुमान जी ने संतृप्ति से डकार ली । सीता उनके आगे आई और बोलीं- पुत्र और परोसू ? नहीं माते ! नहीं ! पेट भर गया है । यह कहकर हनुमान जी रसोई घर से बाहर निकल गए । उसके बाद सीता ने देवी अन्नपूर्णा का स्मरण किया । देवी ने पहले की ही तरह सब बर्तनों में पदार्थों से भर दिया । नागरिक और वानर खाने में जुट गए । वानर पंक्ति को कोने में बैठा एक छोकरा वानर आंवले को बड़े आश्चर्य से देख रहा था । उसने अपनी उंगलियों से उसे दबाया तो उसका बीज ध्वनि करता हुआ , छलांग मारता ऊपर उठा । बालक वानर ने उसे देखते हुए कहा- अरे , तू क्या समझता है कि तुझे ही छलांग मारनी आती है । देखा मेरा कौशल !

यह कहकर वह वानर उठ खड़ा हुआ और ऊपर उड़ा । उसे देखकर एक और वानर उससे भी ऊपर उड़ा । तीसरा भी यह देखता रहा और बड़े उत्साह से उससे भी ऊपर उड़ा । इस प्रकार वानर समूह एक - दूसरे से अधिक अंतरिक्ष में उड़ने लगे । अंगद , नल , नील और सुग्रीव भी उड़े । हनुमान जी ने सोचा कि शायद राजा की यह आज्ञा होगी । वह भी उड़े । उन्होंने केवल औपचारिक छलांग मारी ।


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वहां आए हुए राम ने वानरों के इस कोलाहल को देखा और हनुमान जी से पूछा- हनुमान जी ! जबकि सब वानर आकाश में उड़ रहे हैं , तब तुम केवल एक छलांग मारकर चुप क्यों हो गए ? हनुमान जी ने विनयपूर्वक कहा- प्रभु ! इतने महान वीरों के सामने मेरी क्या हस्ती ? हनुमान जी की बात सुनकर जांबवंत आगे आया और बोला- प्रभु ! जब तक कोई दूसरा नहीं बताता , तब तक अपनी शक्ति सामर्थ्य से हनुमान जी अनभिज्ञ हैं । 

 यह सुनकर श्रीराम ने एक श्वेत कमल Hanuman जी को देते हुए कहा- हमारे वंश के मूल कारक सूर्य भगवान को यह श्वेत कमल समर्पित करना है । सूर्य को श्वेत पद्मधारी कहा जाता है । उन तक यह पहुंचाने की शक्ति केवल तुम्ही में है । हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम की आज्ञा का पालन किया और एक छलांग में आकाश में उड़ गए । आकाश में पहुंचकर उन्होंने सूर्य के रथ को पकड़ लिया । उसने सूर्य भगवान से कहा- गुरुदेव ! श्रीराम ने इस श्वेत कमल को आपको समर्पित करने के लिए कहा है । यह कहकर उन्होंने वह श्वेत कमल के चरणों में रख दिया । 

सूर्य भगवान ने Hanuman जी को चिरंजीवी कहकर आशीर्वाद दिया और फिर अपने हाथ में सजे एक श्वेत पद्म को उन्हें देते हुए कहा- यह पद्म श्रीराम को दे देना । इसके प्रभाव से राम के राज्य पालन के काल में देश सुसंपन्न रहेगा । सूर्य भगवान से अनुमति लेकर हनुमान जी श्वेत पद्म लेकर श्रीराम के पास लौट आए । श्रीराम ने हनुमान जी को गले लगाया और आशीर्वाद दिया । आशीर्वाद पाकर हनुमान जी गंधमादन पर्वत पर उड़ चले और वहां के प्रशांत वातावरण में राम नाम के स्मरण में अपना जीवन सार्थक करने लगे ।

Saturday, 15 October 2022

Premature death से रक्षा पाने के लिए इस रुद्राक्ष

Premature death से रक्षा के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष सुरक्षित होता है और यह पुरुषों , महिलाओं और बच्चों , हर किसी के लिए अच्छा है । यह समान्य खुशहाली , स्वास्थ्य और स्वतंत्रता के लिए है । यह आपके ब्लड प्रेशर को कम करता है , आपकी तंत्रिकाओं को शांत करता है और स्नायु तंत्र में एक तरह की शांति और सतर्कता लाता है

Premature death


यह जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता पाने में मदद करता है और ज्ञान , धन , शक्ति और प्रसिद्धि पाने में मदद करता है । हालांकि , इसमें पंचमुखी रुद्राक्ष का महत्व ज्यादा है । धन और समृद्धि पाने के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की सलाह दी जाती है ।

माना जाता है कि इसको धारण करने से भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद बना रहता है । इसे धारण करने वाले को विशेष सावधानियां बरतने की जरुरत होती है । इसको पहनने से हृदय संबंधित बीमारियां , तनाव , चिंता , रक्त दबाव आदि को नियंत्रित करने में मदद मिलती है । मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए इस रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं । धारणकर्ता को विभिन्न विषयों का ज्ञान अर्जित करने में मदद मिलती है ।


Premature death


Premature death 2 के लिए भी इस रुद्राक्ष को पहन सकते हैं । पंचमुखी रुद्राक्ष साक्षात् शिव स्वरूप है । यह रुद्राक्ष नरहत्या के दोषों को दूर करने में सक्षम है । इस रुद्राक्ष को धारण करने से बृहस्पति के अशुभ फल समाप्त हो जाते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है । ज्ञान और आध्यात्मिक विकास के लिए इस रुदाक्ष को धारण करना चाहिए ।

इस रुद्राक्ष को धारण करने से पहले इसे गंगा जल या कच्चे दूध से शुद्ध कर लीजिए । उसके बाद धूप , दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने की सलाह दी जाती है । इसके बाद ' ॐ ह्रीं नम : ' मंत्र का 108 बार जाप करें ।

पंचमुखी रुद्राक्ष सर्वगुणों से संपन्न है इसके धारण करने से संतान एवं धन सुख प्राप्त होता है । वस्तुतः यह रुद्राक्ष सभी रुद्राक्षों में सर्वाधिक शुभ तथा पुण्य प्रदान करनेवाला माना गया है । इसे धारण करने से शीघ्र ही निर्धनता , दाम्पत्य सुख में कमी , जांघ व कान के रोग , मधुमेह जैसे रोगों का निवारण होता है । पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने वालों को सुख , शांति तथा प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है । ह्रदय रोगियों के लिए तो यह रामबाण ही है । इससे आत्मविश्वास , मनोबल तथा ईश्वर के प्रति श्रद्धा बढ़ती है ।


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इस यंत्र की स्थापना से आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है । मात्र इस यंत्र की स्थापना से ही घर के सभी वास्तु दोष दूर होते हैं । बच्चों की शिक्षा के स्थान पर श्री यंत्र रखने से उनमें एकाग्रता बढ़ती है । तांबे का श्री यंत्र रखने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी होती है ।

कहा जाता है कि श्रीयंत्र की पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है इसलिए लोग अपने घर में श्रीयंत्र की स्थापना करके पूजा और अराधना करते हैं । यदि विधि विधान के साथ श्रीयंत्र की पूजा की जाती है वहां सदैव सुख संपत्ति , सौभाग्य और ऐश्वर्य बना रहता है ।

धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रीयंत्र की पूजा बहुत प्रभावशाली मानी गई है । कहा जाता है कि श्रीयंत्र की पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है इसलिए लोग अपने घर में श्रीयंत्र की स्थापना करके पूजा और अराधना करते हैं ।

यदि विधि - विधान के साथ श्रीयंत्र की पूजा की जाती है वहां सदैव सुख - संपत्ति , सौभाग्य और ऐश्वर्य बना रहता है । यदि आपने अपने घर में श्रीयंत्र की स्थापना की है या करने जा रहे हैं तो इससे संबंधित नियमों का पालन करना भी कुछ बेहद जरूरी है । यदि इन बातों को ध्यान में न रखा जाए तो श्रीयंत्र पूजा करने का उचित फल प्राप्त नहीं होता है ।

सनातन धर्म में शुभ मुहूर्त का बहुत महत्व होता है । शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य से शुभ फल की प्राप्ति होती है , इसलिए कोई भी कार्य करने से पहले मुहूर्त अवश्य देखा जाता है । यदि आप अपने घर में श्री यंत्र स्थापित कर रहे हैं तो किसी योग्य ज्योतिषी से शुभ मुहुर्त की जानकारी अवश्य ले

अगर घर में श्रीयंत्र रख रहे हैं तो उसे भी पूजा स्थान में रखें और देव समान ही नियमित रूप से पूजा करें । शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के साथ श्री यंत्र की पूजा अवश्य करें । इस बात का ध्यान रखें कि एक बार श्री यंत्र को स्थापित करने के बाद रोजाना उसकी पूजा जरूर करनी चाहिए । इसकी पूजा न करने से आपको कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है इसके अलावा इसके नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकते हैं ।

Premature death से रक्षा कोई भी यंत्र आकृतियों , चिन्हों और अंको को उकेरकर बनाया जाता है , किसी भी यंत्र का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए उसका सही तरह से बना हुआ होना आवश्यक है । यदि आप श्रीयंत्र को घर में स्थापित कर रहे हैं तो भलभांति जांच लें कि श्रीयंत्र सही बना हो , गलत श्रीयंत्र की पूजा करने से कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है ।


FAQ


7 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि

किसी बी रूद्राक्ष में जो धारियां बनी होती है उन धारियो के मुख में जाना जाता है किसी रुद्राक्ष में अगर दो धारियां बनी है तो उसे दो मुखी ओर 7 धारियां बनी है तो 7 मुखी होता है 7 मुखी रूद्राक्ष के स्वामी शनिदेव होते है शनिदेव से सम्बंदित समस्या जिनको चल रही होती है बे 7 मुखी रूद्राक्ष पहन सकते है सप्तऋषि मंडल का इसको स्वरूप मानते है ओर इस रूद्राक्ष में सात हॉर्स जितनी ताकत होती है लकशमी प्राप्ति में ये सहायक माना जाता है नोकरी ओर व्यापार में बी महत्बपूर्ण होता है

Friday, 14 October 2022

रात को सोने से पहले करें ये 5 काम | स्किन हमेशा ग्लो करेगी



रात को सोने से पहले दिन भर भागदौड़ की वजह से स्किन रूटीन में ज्यादातर लोग ध्यान नहीं दे पाते , लेकिन अगर रात को सोते समय ही कुछ काम कर लिया जाए तो स्किन के लिए काफी फायदा हो सकता है । स्किन एक्सपर्ट्स की मानें तो त्वचा से जुड़ी तमाम परेशानियों से हमेशा दूर रहना चाहते हो तो आपको बिस्तर पर जाने से पहले ये 5 काम करने होंगे

रात को सोने से पहले

 

रात को सोने से पहले करें ये 5 काम


  • पानी से चेहरा धोना जरूरी

त्वचा की देखभाल के लिए रात को सोने से पहले कुछ बातों को अमल करना जरूरी होता है और उसमें सबसे पहले आता है साफ पानी से चेहरे को धोना । रात को सोने से पहले आपको चेहरे को साफ पानी से धोना चाहिए । क्योंकि स्किन की अशुद्धियों को दूर करने के लिए पानी काफी आवश्यक होता है । रात को सोने से पहले चेहरा धोने से धूल निकल जाती है ।

  • हर्बल फेस मास्क का यूज करें


रात को सोने से पहले चेहरे पर अगर आप हर्बल फेस मास्क लगाते हैं तो स्किन को स्वस्थ और पौषक रख सकते हैं । हर्बल फेस मास्क से स्किन में खोए हुए पोषक तत्वों के अलावा नमी की भरपाई हो जाती है , जो आपकी स्किन के लिए हर प्रकार से उपयुक्त है । आप सोने से पहले , एलोवेरा , मुल्तानी , खीरे या चंदन का पाउडर लगा सकती हैं ।

  • स्किन को मॉइस्चराइज करना जरूरी

अगर आपकी त्वचा रूखी हो गई है तो सोने से पहले फेस के साथ पूरे शरीर पर क्रीम , लोशन या नारियल तेल का प्रयोग करें , इससे स्किन पर नमी आ सकती है । इसे लगाकर सोने से त्वचा में नमी बनी रहेगी और समय से पहले हो रही झुर्रिया भी ठीक हो जाएंगी ।


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  • बालों की मालिश करना जरूरी

स्किन के साथ - साथ आप रात को सोने से पहले बालों की भी मसाज कर सकती हैं । ऐसा करने से आपकी पूरे दिन की थकान मिट जाएगी और आप गहरी नींद सो पाएंगी । गहरी नींद सोने के कारण आपकी स्किन ग्लो करने लगेगी ।

  • आंखों की इस तरह करें देखभाल

रात को सोने से पहले आंखों की सतह का हिस्सा काफी सबसे संवेदनशील है इसलिए इसकी अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत ज्यादा होती है । आंखों के आस - पास की त्वचा पर हो रहे काले दागों को दूर करने के साथ ही झुर्रियों को दूर करने के लिए आंखों की क्रीम का इस्तेमाल करना काफी जरूरी होता है , इसलिए रात को सोने से पहले आंखों के नीचे क्रीम को लगाना ना भूलें ।

Tuesday, 11 October 2022

बाप बेटी के प्यार की अद्भुत दास्तान आपलोग इसे जरुर पढ़े

 

बाप बेटी के प्यार की अद्भुत दास्तान आपलोग इसे जरुर पढ़े


इस फोटो को देखकर आप सबके मन मे तरह तरह के विचार आयेंगे, लेकिन इस फोटो की सच्चाई जानकर आपकी आँखो मे आँसू आ जायेंगे...!

ये फोटो यूरोप के एक पेंटर "मुरीलो" ने बनाया है! यूरोप के एक देश मे एक आदमी को पाव रोटी चुराने के इल्ज़ाम में भूखे मरने की सजा मिली,उसे एक जेल मे बंद किया गया, सजा ऐसी थी की जब तक उसकी मौत नही हो जाती तब तक उसे भूखा रखा जाय! 


उसकी बेटी ने अपने पिता से मिलने के लिये सरकार से अनुरोध किया कि वह हर रोज अपने पिता से मिलेगी! उसे मिलने की इजाजत दे दी गयी, मिलने से पहले उसकी तलाशी ली जाती कि वह कोई खाने का सामान न ले जा सके।उसे अपने पिता की हालत देखी नही गयी! 


वो अपने पिता को जिंदा रखने के लिये अपना दूध पिलाने लगी! जब कई दिन बीत जाने पर भी वो आदमी नही मरा तो पहरेदारों को शक हो गया और उन्होंने उस लड़की को अपने पिता को अपना दुध पिलाते पकड़ लिया, उस पर मुकदमा चला, और सरकार ने कानून से हटकर भावनात्मक फैसला सुनाया, उन दोनो को रिहा कर दिया गया।


ये पेंटिंग युरोप की सबसे महँगी पेंटिंग है...!!


नारी कोई भी रूप में हो चाहे माँ हो चाहे पत्नी हो चाहे बहन हो चाहे बेटी...हर रूप में वात्सल्य त्याग और ममता की मूरत है। नारी का सम्मान करो


Seeing this photo, all kinds of thoughts will come in your mind, but knowing the truth of this photo will bring tears to your eyes...!


 This photo was made by a painter from Europe "Murillo"!  In a European country, a man was sentenced to starvation for stealing a loaf of bread, he was imprisoned in a prison, the punishment was such that he should be starved until he died!



 Her daughter requested the government to meet her father that she would meet her father everyday!  He was allowed to meet, before being found he was searched so that he could not take any food items. He did not see his father's condition!



 She started feeding her milk to keep her father alive!  When the man did not die even after several days, the guards became suspicious and they caught the girl feeding her father to her father, she was prosecuted, and the government gave an emotional verdict out of law, both of them were released.  been done.



 This painting is the most expensive painting in Europe...!!



 Whether a woman is in any form, whether she is a mother, whether she is a wife or a sister, or a daughter, in every form, love is an idol of sacrifice and love.  respect women

मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है पढ़िए यह रोचक कहानी

भगवान् मपुंगू , सबसे बड़े देवता ने धरती और आकाश बनाया , दो मनुष्य एक पुरुष और एक स्त्री बनाई ; जिन्हें दिमाग दिया । किंतु अब तक इन दोनों मनुष्यों को उन्होंने हृदय नहीं दिया था । भगवान् मपुंगू के चार बच्चे थे । 

चंद्र , सूर्य , अंधकार और बरसात । उन्होंने चारों को एक साथ बुलाया और कहा , मैं अब निवृत्त होना चाहता हूँ । अतः मनुष्य अब कभी मुझे देख न सकेंगे । मैं अपनी जगह पर एक हृदय को धरती पर भेजूंगा । किंतु जाने से पहले मैं जानना चाहता हूँ 


मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है पढ़िए यह रोचक कहानी


कि तुम लोग क्या - क्या करोगे ? बरसात ने कहा , मैं मूसलाधार पानी बरसाऊँगा और हर चीज को पानी में डुबो दूँगा । नहीं । भगवान् मपुंगू ने कहा , ऐसा हरगिज नहीं करना चाहिए । इन दोनों की तरफ देखो । उन्होंने स्त्री और पुरुष की ओर इशारा किया , क्या ये लोग पानी के भीतर रह सकेंगे ? तुम सूर्य से इस काम में मदद लो ।


जब तुम जरूरत भर का पानी बरसा दो तब सूर्य को काम करने देना । वह अपनी गरमी से उसे सुखा देगा । और तुम किस तरह काम करोगे ? भगवान् मपुंगू ने सूर्य मैं चाहता हूँ , मैं इतना तेज चमकूँ कि मेरी गरमी से सब से पूछा । जल जाएँ ! उनके दूसरे पुत्र सूर्य ने कहा नहीं । भगवान् मपुंगू ने कहा , 


यह होगा तो फिर मेरे बनाए इन मनुष्यों को भोजन कैसे मिलेगा ? देखो , जब अपनी गरमी से सबकुछ झुलसाने लगोगे तब बरसात को मौका देना । वह पानी बरसाकर राहत देगा और फल अनाज उगने में सहायता करेगा । और तुम , अंधकार ! तुम्हारे कार्यक्रम की क्या रूपरेखा है ? भगवान् ने अंधकार से पूछा । मैं हमेशा - हमेशा के लिए राज्य करना चाहता हूँ । 


अंधकार ने उत्तर दिया । दयालु बनो । भगवान् ने सौम्य स्वर में कहा , क्या तुम मेरी इस अद्भुत रचना को खत्म कर देना चाहते हो ? क्या तुम चाहते हो कि शेर , चीते , सर्प सब अँधेरे में घूमते रहें और मेरी बनाई दुनिया न देख सकें ? चाँद को भी कुछ करने का मौका दो । * उसे धरती पर चमकने दो । जब वह चौथाई रह जाए तब पुनः तुम अपना साम्राज्य फैला सकते हो । 


मुझे काफी देर हो गई है । अब मुझे जाना चाहिए । और भगवान् मपुंगू अंतर्धान हो गए । कुछ समय के बाद हृदय एक पतली सी झिल्ली से आवृत्त उनके पास आया । वह रो रहा था । उसने सूर्य , चंद्रमा , अंधकार और बरसात से पूछा , हमारे पिता भगवान् मपुंगू कहाँ हैं ? पिताजी चले गए ।


उन्होंने कहा , हम जानते भी नहीं हैं कि वे कहाँ गए ! हाय ! मेरी कितनी इच्छा थी कि उनके साथ उनमें लीन हो जाऊँ । किंतु ... खैर , जब तक वे नहीं मिलते , मैं आदमी में प्रवेश करूंगा और उसके माध्यम से पीढ़ी - दर - पीढ़ी ईश्वर को खोजूँगा । हृदय ने कहा । और यही हुआ । मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है । 


शिक्षा : ईश्वर हर किसी में है ।

Monday, 10 October 2022

यह माता मंदिर जिसे कांगड़ा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है इसके इतिहास को विस्तार से जानिए !!

श्री वज्रेश्वरी माता मंदिर जिसे कांगड़ा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है , एक हिंदू मंदिर है जो भारत के हिमाचल प्रदेश में , शहर कांगड़ा में स्थित दुर्गा का एक रूप वज्रेश्वरी देवी को समर्पित है । माता व्रजेश्वरी देवी मंदिर को नगर कोट की देवी व कांगड़ा देवी के नाम से भी जाना जाता है 


कांगड़ा देवी मंदिर



और इसलिए इस मंदिर को नगर कोट धाम भी कहा जाता है । ब्रजेश्वरी देवी हिमाचल प्रदेश का सर्वाधिक भव्य मंदिर है । मंदिर के सुनहरे कलश के दर्शन दूर से ही होते हैं । वर्तमान मे उत्तर भारत की नौ देवियों की यात्रा मे माँ कांगड़ा देवी शामिल हैं । अन्य देवियाँ वैष्णो देवी से लेकर सहारनपुर की शाकंभरी देवी तक है 


स्थान 


वज्रेश्वरी मंदिर भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के कांगड़ा शहर में स्थित है और यह 11 साल का है कांगड़ा के निकटतम रेलवे स्टेशन से किमी दूर । कांगड़ा किला पास ही स्थित है ।


महापुरूष 


पौराणिक कथाओं के अनुसार , देवी सती के पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में उन्हे न बुलाने पर उन्होने अपना और भगवान शिव का अपमान समझा और उसी हवन कुण्ड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिये थे । तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण्ड के चक्कर लगा रहे थे । 


उसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था और उनके ऊग धरती पर जगह - जगह गिरे । जहां उनके शरीर के अंग गिरे वहां एक शक्तिपीठ बन गया । उसमें से सती की बायां वक्षस्थल इस स्थान पर गिरा था जिसे माँ ब्रजेश्वरी या कांगड़ा माई के नाम से पूजा जाता है ।


नगरकोट वाली माता का इतिहास


कहा जाता है कि मूल मंदिर महाभारत के समय पौराणिक पांडवों द्वारा बनाया गया था । किंवदंती कहती है कि एक दिन पांडवों ने देवी दुर्गा को अपने सपने में देखा था जिसमें उन्होंने उन्हें बताया था कि वह नगरकोट गांव में स्थित है और यदि वे खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन्हें उस क्षेत्र में उनके लिए मंदिर बनाना चाहिए अन्यथा वे नष्ट हो जाएंगे । उसी रात उन्होंने नगरकोट गाँव में उसके लिए एक शानदार मंदिर बनवाया । 1905 में मंदिर को एक शक्तिशाली भूकंप से नष्ट कर दिया गया था और बाद में सरकार द्वारा इसका पुनर्निर्माण किया गया था ।


मंदिर की संरचना 


मुख्य द्वार के प्रवेश द्वार में एक नागरखाना या ड्रम हाउस है और इसे बेसिन किले के प्रवेश द्वार के समान बनाया गया है । मंदिर भी किले की तरह एक पत्थर की दीवार से घिरा हुआ है । मुख्य क्षेत्र के अंदर देवी वज्रेश्वरी पिंडी के रूप में मौजूद हैं । मंदिर में भैरव का एक छोटा मंदिर भी है । मुख्य मंदिर के सामने धायनु भगत की एक मूर्ति भी मौजूद है । उसने अकबर के समय देवी को अपना सिर चढ़ाया था । वर्तमान संरचना में तीन कब्रें हैं , जो अपने आप में अद्वितीय है । 


मंदिर के उत्सव 


जनवरी के दूसरे सप्ताह में आने वाली मकर संक्रांति भी मंदिर में मनाई जाती है । किंवदंती कहती है कि युद्ध में महिषासुर को मारने के बाद , देवी को कुछ चोटें आई थीं । उन चोटों को दूर करने के लिए देवी ने नागरकोट में अपने शरीर पर मक्खन लगाया था । इस प्रकार इस दिन को चिह्नित करने के लिए , देवी की पिंडी को मक्खन से ढका जाता है और मंदिर में एक सप्ताह तक उत्सव मनाया जाता

Friday, 7 October 2022

नीम सिर्फ हमारी त्वचा के लिए नहीं बल्कि पेट के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है इसके बारे में रोचक बातें जानिए

अगर आप खाली पेट नीम की पत्तियों का सेवन करते हैं तो या फिर इन्हें पानी में उबाल कर नमक के साथ खाते हैं तो आपको अपने शरीर से इन बीमारियों को करने में मदद मिल सकती है । भारत को आयुर्वेद की सरजमीं कहा जाता है और यहां पाई जाने वाले ढेर सारी जड़ी - बूटियां किसी न किसी रोग में काम जरूर आती है । 

इन जड़ी - बूटियों में हमारे आस - पास मौजूद ऐसे ढेर सारे पेड़ - पौधे पाए जाते हैं , जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं । इन्हीं में एक है नीम , जो भारत के हर हिस्से में पाया जाता है । इस पेड़ की पत्तियों से लेकर टहनियां भी हमारे बड़े काम आ सकती है । 

नीम


नीम का पेड़ यूं तो अपने ढेर सारे लाभ के लिए जाना जाता है और इसका औषधीय उपयोग लगभग हजारों वर्षों से होता आ रहा है । यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र नीम के पेड़ को " 21 वीं सदी का वृक्ष " घोषित कर चुका है । आप शायद इस बारे में जानते हों लेकिन बता दें कि नीम की पत्तियों का सेवन शरीर की अनेक बीमारियों को दूर कर सकता है । 

जी हां , अगर आप खाली पेट नीम की पत्तियों का सेवन करते हैं तो या फिर इन्हें पानी उबाल कर नमक के साथ खाते हैं तो आपको अपने शरीर से इन बीमारियों को करने में मदद मिल सकती है । आइए जानते हैं कौन सी हैं ये बीमारियां ।


नीम के 10 फायदे


ब्लड शुगर करे कंट्रोल 

खराब जीवनशैली के कारण भारत में लगातार डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है । हालांकि लोग अभी भी घरेलू नुस्खों पर विश्वास करते हैं । इन्हीं घरेलू नुस्खों में से एक है नीम के पत्तों को सुबह खाली पेट चबाना । ऐसा करने से ब्लड शुगर को कंट्रोलकरने में मदद तो मिलेगी ही साथ ही आपका खून भी साफ होगा । एक्सपर्ट बताते हैं कि नीम के पत्तों में azadirachtolide नाम का तत्व होता है , जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में प्रभावी होता है । 


कई संक्रमण को रखता है दूर 

जी हां , नीम का उपयोग एक एंटी बायोटिक के रूप में भी किया जाता है , जो सामान्य प्रकार के संक्रमण को रोकने में उपयुक्त होता है । सुबह नियमित रूप से नीम की पत्तियां चबाने पर आपको मूत्रमार्ग और आंखों के संक्रमण में काफी फायदा मिलता है । इतना ही नहीं नीम पित्त और कफ को कम करने का भी काम करता है । नीम की ब्लड प्यूरीफायर , एंटी बैक्टीरियल , एंटी ऑक्सीडेंट खूबियां इसे एक्जिमा , सोरायसिस जैसे अनेक त्वचा विकारों में फायदेमंद बनाती है । 


पेट के लिए लाभदायक 

नीम सिर्फ हमारी त्वचा के लिए नहीं बल्कि पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है । इसमें मौजूद पित्तनाशक गुण एसिडिटी में बेहद उपयोगी होते हैं और आप सुबह खाली पेट पानी में नीम की पत्तियां उबालकर पीने से कब्ज , पेट दर्द , आंतो में मौजूद कीड़ों को बाहर निकालने में मदद मिलती है ।


बुख़ार को करे कम 

मानसून हो या उसके बाद फैलने वाले डेंगू , मलेरिया नीम के पत्ते सभी में बहुत फायदेमंद माने जाते हैं । इन दोनों स्वास्थ्य स्थितियों में बुखार आता है और नीम बुखार को कम करने की अच्छी दवा है । इसकी पत्तियों में स्थित गेंडनिन नाम का यौगिक मलेरिया के तेज बुखार को कम करने में कारगर साबित हुआ है । 


इम्यूनिटी बढ़ाने में फायदेमंद 

सुबह उठकर खाली पेट नीम की पत्तियां चबाने से आपके शरीर को प्राकृतिक गुण प्राप्त होते हैं , जो शरीर में पहुंचकर रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने का काम करते हैं । अगर आप नियमित रूप से नीम की पत्तियां चबाकर पानी पीते हैं या फिर पानी में उबालकर पत्तियों का सेवन करते हैं तो आपको प्राकृतिक इम्यून बूस्टर प्राप्त होता है ।

Friday, 30 September 2022

रुद्राक्ष - jankari

रुद्राक्ष पेड़ का उत्पाद है जो । एक पवित्र मनके के रूप में जाना जाता है । यह ऋषियों , ज्योतिषियों और अन्य आध्यात्मिक संस्थाओं द्वारा पहने जाने वाले प्रसिद्ध रत्नों में से एक है । 

मनके का उपयोग ज्यादातर छोटे या बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है । यह न केवल हिंदू धर्म बल्कि अन्य धर्मों द्वारा भी पूजा जाता है । इस मनके के वैज्ञानिक और ज्योतिषीय लाभ भी हैं । 

पौराणिक मान्यता है कि रुद्राक्ष का उद्भव भगवान शिव के आंसू से हुआ था । इसे स्वर्ग से पृथ्वी के बीच सेतु माना जाता है । रुद्राक्ष ज्यादातर इंडोनेशिया , नेपाल और भारत में पाया जाता है । 

दुनिया में 1 से लेकर 21 मुखी तक रुद्राक्ष उपलब्ध हैं । प्रत्येक मनके का एक अलग उद्देश्य और उपाय है । उन्हें मुख के अनुसार विभाजित किया जाता है जिसे मुखी भी कहा जाता है । 

रुद्राक्ष ऊर्जा से भरा हुआ एक शक्तिशाली आभूषण है , कमजोर दिल वाले उसे पहन नहीं सकते हैं । हालांकि , यह व्यापक रूप से स्वास्थ्य मन और आत्मा के लिए जाना जाता है । इसे पहने से पहले आपको किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह लेनी चाहिए । 

वह आपकी जन्मकुंडली की जांच करेगा और आपको बताएगा कि आपको इसे कैसे और कब पहनना चाहिए । ध्यान दें कि इसे अपने मन से पहनने की गलती न करें यह नकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है 


रुद्राक्ष पहनने के नियम


रुद्राक्ष पहनने के लिए आपको पैसे से खरीदने की जरूरत है , किसी और के पैसे से खरीदा गया रुद्राक्ष आपको लाभ नहीं देगा । 

किसी भी प्रकास का रुद्राक्ष पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से इसे अभिमंत्रित जरूर करा लें और जन्मकुंडली के अनुसार रुद्राक्ष को धारण करें ताकि यह मनका आपको प्रभावी लाभ दे सके । 

इस रुद्राक्ष को ग्रहण करने से पहले , किसी शुभ दिन आपको एक पूजा करवानी होगी और मंत्रोच्चार करते हैं इसे पहनना होगा । 

रुद्राक्ष को गंदे हाथों से ना छुए वरना यह अपवित्र हो सकता है । 

रुद्राक्ष धारी को माँस और मदिरा का सेवन करना त्याग देना चाहिए । 

रुद्राक्ष को धारण करने से पहले हमेशा तेल से साफ करके पहनना चाहिए । वैसे तो बाजार में कई तरह के रुद्राक्ष उपलब्ध हैं लेकिन आपको जिस मुखी रुद्राक्ष की जरूरत है उसकी पहचान करके ही धारण करें । ० 

ररुद्राक्षधारियों को नियमित रूप से भगवान शिव की प्रार्थना करनी चाहिए ।


रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान


जिन लोगों ने जीवन में पाप किया है और मुक्ति चाहते हैं तो उनके लिए यह मनका फायदेमंद है । 

यह मनका आपकी जन्मकुंडली में क्रूर ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद करता है । 

यह पहनने वाले को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है । 

यह पहनने वाले को तनाव और हाईब्लडप्रेशर को कम करने में मदद करता है । 

यह रुद्राक्षधारी को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है । 

यह चेचक जैसे सभी प्रकार के त्वचा रोगों को ठीक करने में मदद करता है । 

यह मिर्गी और जहर के घावों को ठीक करने में मदद करता है । 

यह पहनने वाले के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना देता है । 

खासतौर पर खानाबदोश लोगों के लिए , यह निपटान , स्थिरता और सहायता प्रदान करता है । राशि चक्र पर रुद्राक्ष लाभ

राशि के अनुसार रुद्राक्ष


राशि अनुसार रुद्राक्ष पहनने से इसका प्रभाव बढ़ जाता है । यह आपके जीवन पर लाभकारी असर डालता है । यह पहनने वाले को सकारात्मकता देता है और गुस्सा भी कम करता है । 

पौराणिक रूप से रुद्राक्ष को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है , क्योंकि यह सभी प्रकार के ग्रहों का इलाज करने और अप्रत्याशित घटनाओं को संभालने में मदद करता है । यह एक शक्तिशाली उपाय है जिसने बहुत से लोगों को राशि चक्र , ज्योतिषीय महत्व और स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का इलाज करने में मदद की है ।

Sunday, 25 September 2022

कभी भी अपने घर के भेद किसी दूसरे को नहीं बताने चाहिए भेद बताने से भारी हानि को झेलना पड़ सकता है जरूर पढ़िए कहानी - jankari

एक नगर में देवशक्ति नाम का राजा रहता था । उसके पुत्र के पेट में किसी तरह सांप चला गया । सांप राजा के पुत्र के पेट में ही अपना बिल बनाकर रहने लगा । उसके कारण उसका शरीर दिन प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था । बहुत उपचार करने के बाद भी उसका स्वस्थ नहीं सुधर रहा था । यह देख राजपुत्र अपना राज्य छोड़ कर किसी दूसरे राज्य में चला गया और वहां के एक मंदिर में भिखारी की तरह रहने लगा । उस राज्य के राजा की दो पुत्रियां थी । वे दोनों जब भी अपने पिता को प्रणाम करती तो प्रणाम कहते हुए पहली पुत्री कहती है महाराज ! आपकी जय हो । 


There lived a king named Devshakti in a city.  Somehow a snake got into his son's stomach.  The snake started making its bill in the stomach of the king's son.  Because of that his body was getting weaker day by day.  Even after many treatments, his health was not improving.  Seeing this, the prince left his kingdom and went to another state and started living like a beggar in a temple there.  The king of that kingdom had two daughters.  Whenever both of them bowed down to their father, the first daughter while saying obeisance says, 'Maharaj!  Hail thee .  


कभी भी अपने घर के भेद किसी दूसरे को नहीं बताने चाहिए भेद बताने से भारी हानि को झेलना पड़ सकता है जरूर पढ़िए कहानी !!


आपकी कृपया से इस राज्य में सुख हैं । दूसरी लड़की प्रणाम करते समय कहती है - महाराज आपके कर्मों का फल भगवन आपको दे । दूसरी पुत्री का प्रणाम सुनकर राजा को गुस्सा आ जाता था । एक दिन राजा ने क्रोध में आकर मंत्री से कहा इस कटु वचन बोलने वाली लड़की को किसी गरीब परदेशी के साथ भेज दो । मंत्रियों ने उस लड़की का विवाह मदिंर में रहने वाले उसी राजपुत्र से करवा दिया जिसके पेट में सांप रहता था ।


There is happiness in this kingdom by your kindly.  Another girl says while bowing - Lord, may God give you the fruits of your actions.  The king got angry after hearing the second daughter's salutation.  One day the king got angry and said to the minister, send the girl who spoke this bitter word with some poor foreigner.  The ministers got that girl married to the same prince who lived in the temple, who had a snake in his stomach.


वह लड़की अपने पतिधर्म के अनुसार राजपुत्र की बहुत सेवा करती थी । दोनों ने उस राज्य को छोड़ दिया थोड़ी ही दूर जाने पर वह आराम करने के लिए एक तालाब के किनारे ठहरे । वह लड़की राजपुत्र को तालाब के किनारे छोड़ कर खाने पिने का सामान लेने लिए गयी । जब वह वापिस लोटी तो उसने दूर से देखा कि उसका पति एक बाम्बी के पास सोया हुआ है और उसके मुहं से एक काला सांप निकल कर बाम्बी से निकले सांप के साथ बाते कर रहा था ।


The girl used to serve the king a lot according to her husband's religion.  Both of them left that kingdom, after going a short distance, they stayed on the bank of a pond to rest.  The girl left Rajputra on the bank of the pond and went to get food and drink.  When she returned, she saw from afar that her husband was sleeping beside a Bambi and a black snake came out of his mouth and was talking with the snake that came out of Bambi.


बाम्बी से निकला सांप कहता है- अरे दुष्ट ! तू क्यों इस सुन्दर राजकुमार के जीवन को बर्बाद कर रहे हो । पेट वाला सांप कहता है - तू भी तो इस बिल में स्वर्ण कलश को दूषित कर रहे हो । बाम्बी वाला सांप कहता है - तू समझता है कि तुझे कोई राजकुमार के पेट में मार नहीं सकता ? कोई भी व्यक्ति उबली हुयी राई देकर तुझे मार सकता है । पेट वाला सांप बोला - तुझे भी तो तेरे बिल में गरम तेल डालकर मार सकता है । 


The snake that came out of Bambi says - Oh wicked!  Why are you ruining the life of this handsome prince?  The stomach snake says - You are also polluting the golden urn in this bill.  Bambi's snake says - You understand that no one can kill you in the stomach of a prince?  Anyone can kill you by giving boiled mustard seeds.  Stomach snake said - You too can kill you by pouring hot oil in your bill.  ,


इस तरह बात चित करते हुए वह एक दूसरे के भेद खोल देते हैं । वह लड़की उनकी सुनी हुयी बातों को जानकर उन्हें उसी प्रकार मार देती है । परिणामस्वरूप उसके पति का स्वास्थ्य भी ठीक हो जाता है और स्वर्ण कलश मिलने से वे धनवान भी बन जाते हैं । दोनों राजकुमार के देश चले जाते है और अपनी सारी कहानी बतातें हैं राजकुमार के माता पिता उनका स्वागत करते हैं ।


While talking like this, they open the differences between each other.  Knowing what they heard, the girl kills them in the same way.  As a result, her husband's health also gets better and by getting the golden urn, he also becomes wealthy.  The two go to the prince's country and narrate their entire story, the prince's parents welcome them.


कहानी की शिक्षा

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कभी भी अपने घर के भेद किसी दूसरे को नहीं बताने चाहिए | भेद बताने से भारी हानि को झेलना पड़ सकता है ।


Lesson of the story


This story teaches that one should never tell the secrets of one's house to anyone else.  Discrimination can result in heavy loss.



हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए लालच करने से हमेशा हानि ही होती है जानें रोचक कथा


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Friday, 23 September 2022

गणेश जी की कहानी | गणेश जी महाराज की कहानी

18 पुराणों में देवी देवताओं को आदर्श बताया गया है । पुराणों में देवी देवताओं की कहानी के साथ पुण्य और पाप का प्रतिफल बताया गया है ताकि सुनने वाले पाप - पुण्य का फेर समझ सकें । वेद व्यास लिखित 18 पुराणों में से एक है , गणेश पुराण | गणेश पुराण में पांच खंड हैं । गणेश पुराण में गणेश जी की लीलाओं का बखान है । हम आपको में गणेश पुराण की सम्पूर्ण कथा इस पीडीऍफ़ में दे रहे है

भारतीय जीवन - धारा में जिन ग्रन्थों का महत्वपूर्ण स्थान है उनमें पुराण भक्ति ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं । पुराण साहित्य भारतीय जीवन और साहित्य की अक्षुण्ण निध हैं । 

इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएँ मलती हैं । कर्मकांड से ज्ञान की ओर आते भारतीय मानस चंतन के बाद भक्ति की अवरल धारा प्रवाहित हुई है । 

वकास की इसी प्रक्रया में बहुदेववाद और निर्गुण ब्रह्म की स्वरूपात्मक व्याख्या से धीरे - धीरे मानस अवतारवाद या सगुण भक्ति की ओर प्रेरित हुआ । अठारह पुराणों में अलग -अलग देवी - देवताओं को केन्द्र मानकर पाप और पुण्य कर्म , और अकर्म की गाथाएँ कही गई हैं । आज के निरन्तर द्वन्द्व के युग में पुराणों का पठन मनुष्य को उस द्वन्द्व से मुक्ति दिलाने में एक निश्चित दिशा दे सकता है और मानवता के मूल्यों की स्थापना में एक सफल प्रयास सद्ध हो सकता है । 

इसी उद्देश्य को सामने रखकर पाठकों की रुच के अनुसार सरल सहज और भाषा में पुराण साहित्य की श्रृंखला में यह पुस्तक गणेश पुराण प्रस्तुत है । 1 धर्म और अधर्म , , पुराण साहित्य भारतीय साहित्य और जीवन की अक्षुण्य निध है । इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएं मलती हैं । 


निरन्तर द्वन्द्व और निरन्तर द्वन्द्व से मुक्ति का प्रयास मनुष्य की संस्कृति का मूल आधार है । पुराण हमें आधार देते हैं । इसी उद्देश्य को लेकर पाठकों की रुच के अनुसार सरल , सहज भाषा में प्रस्तुत पुराण- साहित्य की श्रृंखला में उप पुराण ' गणेश पुराण ' ।

कैसे हुई गणेश पुराण की शुरुआत


गणेश पुराण भगवान् श्री गजानन के अनंत चरित्र को दर्शाता है । इसको सुनाने और सुनने वाले सभी का कल्याण होता है और श्री गणेश की कृपा बनी रहती है । श्री गणेश प्रथम पूज्य तो हैं ही , साथ ही वघ्नेश्वर भी कहे जाते हैं क्यों क श्री गणेश अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर कर देते हैं । गणेश पुराण श्री गणेश जी की महिमाओं से जुड़ी बहुत सी बातें बताता है ।

गणेश पुराण की उत्पत्ति के बारे में जानने से पहले मह र्ष भृगु द्वारा राजा सोमकान्त को गणेश पुराण सुनाये जाने के बारे में जानना चाहिए । राजा सोमकान्त सौराष्ट्र की राजधानी देवनगर के राजा था । वह वेदों , शस्त्र वद्या आदि के ज्ञान से संपन्न था । 

उसने अपने पराक्रम के बल पर अनेक देशों पर वजय प्राप्त की थी । उसने अपनी प्रजा का पालन पुत्र की भांति कया था । उसकी पत्नी सुधर्मा पतिव्रत धर्म का पालन करने वाली अति सुंदर तथा गुणवती स्त्री थी । 

राजा भी पत्नीव्रत धर्म का पालन करने वाला अति उत्तम पुरुष था । जितना उत्तम राजा था उतना ही उत्तम उसका पुत्र था , जो सभी तरह की चयाओं में निपुण और प्रजा के भले की सोचने वाला था । राजा का जीवन पूर्ण सुखी और सम्माननीय था । परन्तु युवावस्था के अंत में राजा को कुष्ठ रोग हो गया था । 

बहुत उपचार करवाने पर भी कोई फायदा नहीं तो राजा निराश हो गया और राजपाट छोड़कर वन में जाने की ठान ली । अपने मंत्रियों से पुत्र को राज्य चलने में मदद करने को कहकर राजा ने शुभ मुहूर्त देखकर पुत्र का राज्या भषेक कया और फर वन के लए चल पड़ा । सोमकान्त के पीछे उसका पुत्र सभी मंत्रीगण और प्रजाजन भी चल दिये । 

जिन्हें राजा ने राज्य की सीमा पर पहुंचकर समझाकर वापस लौटाया । पुत्र के कहने पर राजा ने 2 सेवक अपने साथ में ले लये ।  वन में पहुंचकर राजा , उसकी पत्नी और सेवक एक साफ़ और समतल जगह देखकर वश्राम के लए रुके , जहाँ पर उन्हें मह र्ष भृगु का पुत्र च्यवन मला । 

च्यवन से परिचय के पश्चात् च्यवन ने राजा के रोग की बात मह र्ष भृगु से जाकर कही । मह र्ष के कहने पर च्यवन राजा उसकी पत्नी और सेवकों को आश्रम ले गया । जहाँ उन्होंने स्नानादि करके भोजन कर रात्रि वश्राम कया । अगले दिन सुबह उठकर नित्यकर्मों से निवृत होकर राजा मह र्ष भृगु के सामने उपस्थित हुआ । 

महर्ष भृगु ने राजा को उसके रोग का कारण उसके पूर्वजन्म के पाप बतायें । जब राजा ने पूर्वजन्म के पाप के बारे में जानना की इच्छा जताई तो श्री भृगु ने उन्हें पूर्वजन्म में की गयी निर्दोषों की हत्याओं लूटपाट आदि के बारे में बताया । 

मह र्ष ने उन्हें यह भी बताया क कैसे जीवन के अंतिम समय में राजा सोमकान्त ने भगवान श्री गणेश्वर के खंडहर हो चुके मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया जिसके कारण राजा को पुण्य की प्राप्ति हुई । पूर्वजन्म में मृत्यु के बाद जब राजा को यमदूतों ने यमराज के सामने पेश कया तब यमराज के ये पूछने पर क राजा पाप और पुण्य में से कसे पहले भोगना चाहता है , 

राजा ने पुण्य भोगने की बात कही थी । इसी कारण इस जन्म में अब तक राजा बनकर सोमकान्त उसी पुण्य को भोग रहा था परन्तु अब पुण्य का समय ख़त्म हो गया था और पाप भोगने का समय शुरू हो चूका था इस लए सोमकान्त कुष्ठ रोग से पी इत हो गया था । राजा सोमकान्त के रोग से मुक्त होने का उपाय पूछने पर मह र्ष ने उन्हें गणेश पुराण सुनने के लए कहा । 

परन्तु राजा ने तो कभी गणेश पुराण के बारे में कुछ भी नहीं सुना था इस लए राजा ने महर्ष भृगु से निवेदन कया क मह र्ष से ज्यादा ज्ञानी और उत्तम कोई दूसरा व्यक्ति नहीं हो सकता जो क • गणेश पुराण सुना सके , अतः स्वयं मह र्ष ही राजा को गणेश पुराण सुना दें । मह र्ष ने राजा की बात मान ली और राजा पर अ भमंत्रित जल छिड़का जिससे राजा को एक छींक आयी और उसकी नाक से एक काला और अजीब सा दिखने वाला पुरुष बहार निकला जो बड़ा होता गया और उसे देखकर सभी डर गये । 

यह पुरुष पाप था और मह र्ष के द्वारा राजा पर डाले गये जल के कारण राजा के शरीर से बहार आ गया था । मह र्ष के कहने पर पाप अपनी भूख शांत करने के लए निकट स्थित एक आम के पेड़ के पास गया और जैसे ही आम खाने के लए पेड़ को हुआ तो पूरा पेड़ जलकर भस्म हो गया । इसके घटना के बाद पाप गायब हो गया । राजा को अपने रोग में आराम मल गया था । 

महर्ष ने आम के पेड़ के वापस पहले जैसा न होने तक गणेश पुराण सुनाने की बात कही । राजा के मन में प्रश्न उठा क आ खर गणेश पुराण की रचना कसने की और उन्होंने मह र्ष से यह पूछा । मह र्ष भृगु ने तब राजा को बताना शुरू कया ।

" महर्ष वेदव्यास जी ने जब वेदों में लखी सभी बातों को चार अलग - अलग वेदों में आसान भाषा में बदल दिया तब सभी वद्वानों में उनकी बड़ी तारीफ हुई । इस बात से वेदव्यास जी को स्वयं पर गर्व हो गया । उसी गर्व के चलते अब वह पुराणों की रचना करना चाहते थे , 

इस लिए उन्होंने पुराणों की रचना शुरू की । परन्तु अपने अ भमान के चलते उन्होंने भगवान श्री गणेश की आराधना कये बिना ही पुराणों की रचना शुरू कर दी और गणेश जी को आराधना तो हर शुभ कार्य के पहले अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए थी क्यों क वे तो प्रथम पूज्य हैं । 

वेदव्यास जी से हुई इस गलती का दंड तो उन्हें मलना ही था । पुराणों की रचना करते समय वेदव्यास जी बहुत सी महत्वपूर्ण बातों के वषय में भूलने लगे और इससे पुराणों की रचना में वघ्न होने लगा । वेदव्यास जी काफी निराश हुए और उन्होंने भगवान ब्रह्मा जी से इसके हेतु मलना तय कया और वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे । 

उन्होंने सारी बात ब्रह्मा जी को बताई । तब ब्रह्मा जी ने उन्हें बताया के भगवान श्री गणेश कसी को भी अभमानी नहीं रहने देते हैं , वे तो सर्वज्ञ हैं । वेदव्यास जी को अपनी भूल का आभास हो गया था और वे इसका पश ्चाताप करने का उपाय जानने के इच्छुक हुए तब ब्रह्मा जी ने उन्हें भगवान श्री गणेश की पूजा करने के लए कहा और उन्हें पूर्ण पूजा वध के बारे में बताया । 

पूजा वध जानने के बाद वेदव्यास जी गणेश जी के बारे में और ज्यादा जानने को उत्सुक हुए तब भगवान ब्रह्मा जी ने उन्हें श्री गणेश जी की महिमाओं के बारे में कई कथाएं कही उन्हीं सब गणपति महिमाओं को संक लत कर मह र्ष वेदव्यास जी ने गणेश पुराण की रचना की थी । ·

Thursday, 22 September 2022

शकुन

शकुन समाज में प्रचलित एक अवधारणा है जिसमें यह माना जाता है कि कुछ विशेष प्रकार की परिघटनाएँ हमारे भविष्य का संकेत देती हैं । अनुकूल भविष्यवाणी करने वाले शकुन को शुभ शकुन तथा प्रतिकूल भविष्यवाणी करने वाले शकुनों को अपशकुन कहा जाता है । 

न केवल भारत में अपितु विश्व भर में ये शकुन प्रचलित हैं । भारतीय संस्कृति में शकुन का संकेत वेदों पुराणों व धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है । महाभारत व रामायण जैसे महाकाव्यों में भी कई जगह शकुनों की बात कही गई है । ज्योतिष में भी शकुनों पर विशेष विचार किया जाता है । प्रश्न कुंडली की विवेचना में शकुनों का महत्व विशेष है । प्राचीन काल में ये शकुन लोकवार्ता के द्वारा ही पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचते रहे हैं । वैज्ञानिक दृष्टि से इन शकुनों को बहुधा अंधविश्वास ही माना जाता हैं । 

शुभ शकुनों में पूछे गये प्रश्न सफल व अपशकुनों में पूछे गये प्रश्न असफल होते देखे गये हैं । शकुन पृथ्वी से आकाश से स्वप्नों से व शरीर के अंगों से संबंधित हो सकते हैं । किसी भी कार्य के वक्त घटित होने वाले प्राकृतिक व अप्राकृतिक तथ्य अच्छे व बुरे फल की भविष्यवाणी करने में सक्षम होते है । 

शुभ शकुन ब्राह्मण घोड़ा हाथी न्योला बाज मोर । दूध फल फूल व वेद ध्वनि का सोर । अन्न सिंहासन जल कलश पशु एक बधन्त । न्योला चापा मछली और अग्नि प्रज्वलंत । छाता वैश्या पगड़ी अंजन ऐना शस्त्र । कन्या रत्न स्त्री धोबी धोया वस्त्र । घृत मिट्टी अस्त्र शहद मदिरा वस्त्र श्वेत । गोरोचन सरसों अमिष गन्ना खज्जन भेद | बिन रोदन मुर्दा मिले पालकी भरदुल गीत । ध्वज अकुंश बकरा पडे सम्मुख अपना गीत । 

बालक संग स्त्री मिले नौ बेटा बैल सफेद । साधु सुधा सुरतर - पड़े सम्मुख चारों वेद । कूड़ा से भरी टोकरी जो सम्मुख पड़ंत । पाछे घट खाली पड़े निश्चय काज बनंत ।। प्रिय वाणी कानों पड़े सम्मुख वाहन भार । कह कवि ये शुभ शकुन यात्रा चलती बार । अर्थात् ब्राह्मण घोड़ा हाथी न्योला बाज मोर दूध दही फल फूल कमल वेदध्वनि अन्न सिंहासन जल से भरा कलश बंधा हुआ 

एक पशु न्योला चापा ( चाहा पक्ष ) मछली प्रज्वलित अग्नि छाता वैश्या पनाली अंजन ऐना शस्त्र रत्न स्त्री कन्या धुले हुए वस्त्र सहित धोबी घी मिट्टी सरसों मांस गन्ना खज्जन पक्ष रोदन रहित मुर्दा पालकी भारद्वाज पक्षी ध्वजा अंकुश बकरा अपना प्रिय मित्र बच्चे के सहित स्त्री गाय या गोह के सहित बछड़ा सफेद बैल साधु अमृत कल्पवृक्ष चारों वेद शहद शराब गोरोचन आदि में से कुछ भी सम्मुख पड़े या कूड़े से भरी टोकरी प्रिय वाणी या सामान से लदा वाहन यदि यात्रा के वक्त सम्मुख पड़ जाए तो निश्चय ही इच्छा पूर्ति का संकेत करते खाली घड़ा पीठ पीछे हो तो अच्छा है ।

 ये शुभ शकुन हैं । नीलकण्ठ छिक्कर - पिक्कर वानर कौवी भालु । जै कुकर दाएं पड़े तो सिद्ध होय सब काजु । अर्थात् नीलकण्ठ छिक्कर नामक विशेष मृग पिक्कर पक्षी कौवी ( स्त्री संज्ञक ) भालू व कुत्ता यदि दाएं हाथ पर पड़े तो कार्य सिद्ध होता है । 

मृग बाएं ते दाहिने जो आवे तत्काल । बाएं गर्दभ रेकंजा सिद्धि होय सब काज । अर्थात् यदि हिरण बायीं तरफ से रास्ता काटकर दायीं तरफ आ जाए या बायीं तरफ गधा बोलना प्रारंभ कर दे तो शुभ शकुन है ।

खड़ा कोबरा सूकरा जाहक कछुआ गोह । ये शब्द कानों पड़े निश्चय कारज होय । पर दर्शन हो जाएं तो महाअशुभ होय । अतिहि कु शकुन जानिये काट सके ना कोय । अर्थात् यदि खरगोश सर्प सूअर जाहक पशु कछुआ व गोह के शब्द कानों में पड़े तो अत्यंत शुभ शकुन समझें । 

परंतु यदि ये प्रत्यक्ष सामने पड़ जाएं तो महा अशुभ हैं । बानर भालु दर्शन भले नाम के सुनते हानि । कह कवि विचार के तब आगे करौ पदान । अर्थात् यदि वानर भालू यात्रा आरंभ वक्त आगे जाए तो उत्तम शकुन है परंतु यदि इनका नाम कानों में पड़े तो अपशकुन का द्योतक है । 

अपशकुनुन विचार दांए गर्दभ शब्द हो सम्मुख काला धान्य । टूटी खाट आगे मिले तो बहुत हानि । कूकूर लोटे भुम्म पर अथवा मारे कान । पांच भैंस सम्मुख पड़ें निश्चय होवे धन । एक अजाः नौ स्त्री बिल्ली दो लड़न्त । छह कुत्ता आगे पड़ें नहीं बात में तंत । तीन गाय दो बानिया एक बछड़ा एक शूद्र । हाथी सात सम्मुख निश्चय बिगड़े बुद्धि । भैंसा पर बैठा हुआ मनुष्य सम्मुख होय । निश्चय हानि होयेगी बचा सके ना कोय । 

जननी का तिरस्कार होय या हो अकाल वृष्टि । क्षत्री चार सम्मुख निश्चय महाअनिष्ट | तीन विप्र बैरागिया संन्यासी केश खुलंत । भगवा व स्त्री सम्मुख पड़े निश्चय कारण अंत । बंध्या रजः रजस्वला भूसा हड्डी चामं । अंधा बहरा कूबड़ा विधवा लगड़ा पांव । ईंधन लक्कड़ उन्मादिया भैंसा दो लड़ंत । 

गुंड मट्ठा कीचड़ पड़े सम्मुख छींक हुवंत । हिजड़ा विष्ठा तेल जो मालिश तेल मनुष्य । अंग भंग नंगा पतित रोगी पूरा सुस्त । गंजा भिजे वस्त्र सों चर्बी शत्रु सांप । नमक औषधि गिरगिरा कुटंबी झगड़े आप । कटु बचन सम्मुख पड़े जौ यात्रा चलती बार । कह कवि हानि महा बिगड़े सारे काज । 

अर्थात् यदि यात्रा के समय गधा दायीं तरफ बोले या कोई सामने से टूटी खाट लाता हुआ मिले कारज भंग होता है । यदि कुत्ता भूमि पर लेटे या कान फड़फड़ाये पांच भैंस सामने आये एक बकरी नौ स्त्री दो बिल्ली लड़ती हुई छः कुत्ते तीन गाय दो वैश्य एक बैल एक शूद्र सात हाथी या भैंसे पर बैठा हुआ व्यक्ति यदि सम्मुख पड़े तो अपशकुन का सूचक है । 

यात्रा में चलते समय जननी का तिरस्कार करे या अकाल वर्षा हो चार क्षत्रिय तीन ब्राह्मण बैरागी सन्यासी खुले केशों वाला गेरूरा वस्त्र धारण करने वाला सम्मुख पड़ जाए तो अपशकुन है । 

इसी प्रकार बांझ औरत स्त्री का रज रजोवती स्त्री भूसा हड्डी चमड़ा अंधा बहरा कूबड़ा विधवा स्त्री जलाने वाली लकड़ी उपला पागल गुड़ मट्ठा कीचड़ सामने आये दो भैंसे लड़ते हुए नपुसंक विष्ठा तेल मालिश किये आदमी अंग भंग नंगा नीच पुरुष दीर्घ रोगी गंजा भीगे वस्त्रों में चर्बी सर्प शत्रु नमक औषधि गिरगिट सामने आ जाए अपने ही कुटुंबी सामने लड़ते हों सामने कोई छींक दे या यात्रा के वक्त अप्रिय बचन सुनाई पड़ें तो अपशकुन का सूचक है । काक स्पर्श व छिपकली के गिरने को अशुभ समझा गया है ।

 यदि कौआ अचानक शोरगुल करे या किसी के सिर पर बैठे तो आर्थिक हानि दर्शाता है । यदि स्त्री के सिर पर बैठे तो पति को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है । 

संध्या के समय मुर्गों की ध्वनियां महामारी दर्शाती हैं । जब मछलियां जल की सतह पर छलांग मारें मेढक टर्र - टर्र करे बिल्ली भूमि खोदे चीटियां अपने अंडों को स्थानांतरित करें सांपों का जोड़ा व पशु आकाश की ओर देखे पालतू पशु बाहर जाने से घबराएं तो तुरंत ही वर्षा होती है । ये वर्षा के लिए शुभ शकुन है । 

यदि रात्रि में दीपकीट दिखाई दे कीड़े या सरीसृप घास के ऊपर बैठें तो भी तत्काल वर्षा होती है । यदि वर्षा ऋतु के दौरान सायंकाल में गीदड़ों की चिल्लाहट सुनाई दे तो बिल्कुल वर्षा नहीं होती । मांसभक्षी पशु - पक्षी का दिखाई देना अशुभ व शाकाहारी पशु पक्षी प्रायः शुभ शकुन का संकेत देते हैं ।

ज्योतिष में शकुनों अपशकुनों का विशेष विचार प्रश्न आदि में किया जाता है । साथ ही साथ मेदिनीय ज्योतिष में भी शकुन अपना विशेष महत्व रखते हैं - वर्षा होगी या नहीं होगी कम होगी या अधिक होगी इस प्रकार की भविष्य वाणियां भी शकुनों के आधार पर की जाती हैं कुछ उदाहरण निम्न हैं यदि आसमान बादलों से घिरा हो व पालतू कुत्ता घर से बाहर न जाए तो वर्षा का सूचक है । 

यदि आसमान में चील 400 फुट की ऊंचाई पर उड़ रही हो तो भी वर्षा होने वाली होती है । यदि मकड़ी घर के बाहर जाला बनाए तो वर्षा ऋतु जाने का सूचक है । मेढकों की टर्रराहट वर्षा का संकेत है । मोर का नृत्य तथा शोर भी वर्षा का सूचक है ।

Tuesday, 20 September 2022

आधार कार्ड | आधार कार्ड डाउनलोड | आधार कार्ड चेक

Aadhar Card - आधार कार्डआवेदन

नए आधार कार्ड के लिए आवेदन करने के लिए, आपको अपने निकटतम आधार नामांकन केंद्र जाने की आवश्यकता
होगी। नामांकन केंद्र में, आपको एक आवेदन पत्र भरना होगा, और पहचान प्रमाण और पते के प्रमाण के लिए आवश्यक
दस्तावेजों के साथ अपनी बायोमेट्रिक जानकारी जमा करना होगा।
नामांकन केंद्र पर आधार कार्ड के लिए आवेदन करना

1. आधार के लिए आवेदन करने से पहले एक आवेदक को ध्यान रखना चाहिए कि उसके पास आधार कार्ड के लिए
नामांकन करने के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज केंद्र पर जाते समय तैयार हों। आधार कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया
नाबालिकों और वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी भारतीय नागरिकों के लिए है।


2. उन्हें केवल नामांकन के समय प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। कोई भी व्यक्ति ये कैसे कर सकता है:

3. अपने निकट, एक आधार नामांकन केंद्र खोजें। यदि आप टियर I शहरों में रहते हैं, तो आप इसे
https://uidai.gov.in/images/Tier1 Cities PECs.pdf पर पा सकते हैं

4. आप अन्य शहरों में भी https://appointments.uidai.gov.in/easearch.aspx पर जाकर आधार नामांकन केंद्र पा
सकते हैं

5. https://uidai.gov.in/images/aadhaar_enrolment correction form version 2.1.pdf पर जाकर आवेदन पत्र
भरें (ये ऑनलाइन भी उपलब्ध है)

6. फिर पहचान प्रमाण और निवासप्रमाण जैसे सहायक दस्तावेजों के साथ फॉर्म को जमा करें।

7. सभी दस्तावेज स्वीकार हो जाने के बाद आप अपना बायोमीट्रिक डेटा, जिसमें उंगलियों के निशान और आँखों की
पुतलियों की पहचान भी शामिल है, उन्हें जमा करें।

8. आपकी तस्वीर भी आधार के लिए ली जाती है।

9. आपको रसीद मिलेगी जिस पर 14 डिजिट का एनरोलमेंट न० लिखा होगा। इसका उपयोग आधार कार्ड का स्टेटस
जानने के लिए किया जाता है

10. जब तक आप अपना आधार कार्ड प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक रसीद न० सुरक्षित रूप से रखी जानी चाहिए।
भारत में कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहाँ भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा आधार नामांकन किया जाता है। इन स्थानों
में शामिल हैं:

• आसाम

• मेघालय

● अरुणाचल प्रदेश

● पश्चिम बंगाल

• ओडिशा

• तमिलनाडु

• दादरा और नगर हवेली

● ग्रामीण बैंगलोर

• जम्मू और कश्मीर

● मिजोरम

• लक्षद्वीप

• इन स्थानों के लिए आधार के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया वैसी ही है जैसी कि बाकी देश के लिए है।

आधार कार्ड बनाने के लिए जरूरी दस्तावेज

√ पैन कार्ड

√ राशन कार्ड

√ ड्राइविंग लाइसेंस

√ वोटर ID

√ मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र

√ शस्त्र लाइसेंस

√ बैंक की डायरी

√ फोटो क्रेडिट या डेबिट कार्ड

√ पेंशनभोगी फोटो कार्ड

√ स्वतंत्रता सेनानी फोटो कार्ड

√ किसान फोटो पासबुक

आधार कार्ड के लाभ

किसी भी काम को करने के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता पड़ती है

स्कूल या कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए आधार कार्ड चाहिए ।

किसी भी फॉर्म को भरने के लिए आधार कार्ड नंबर पूछा जाता है।

नया सिम कार्ड लेने के लिए भी आधार कार्ड चाहिए ।

पैन कार्ड को अप्लाई करने के लिए भी सबसे पहले हमारे पास आधार कार्ड होना चाहिए ।

या हम यह बोल सकते हैं कि बिना आधार कार्ड के अब कोई भी काम संभव नहीं है।

आधार कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट

मेरे प्यारे दोस्तों यदि आप अधार कार्ड बनवाना चाहते हैं। तो आपको पहले ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेनी होगी जो की

बहुत ही आसान है। हम आपको बताएंगे कि आपने आधार कार्ड के लिए किस प्रकार ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेंगे
ध्यानपूर्वक पढ़ें।

आपको आधार सेन्टर मे जाकर के लम्बी कतार में घंटो खडे रहने की कोई जरुरत नहीं है। क्यूंकि अब आप अपॉइंटमेंट
ऑनलाइन ले सकते है।

UIDAI की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाये 

http://appointments.uidai.gov.in/

आप अपनी स्टेट का चयन करे।

अगले कॉलम में District/City चयन करे।

आप अपना एरिया का चयन करे।

अब आप Search बटन पर क्लिक करे।

अब आपकी स्क्रीन पर आधार कार्ड एनरोलमेंट सेन्टर का अपॉइंटमेंट फॉर्म खुल गया है।

आप इसमें अपनी ई-मेल अईडी, कांटेक्ट नंबर, स्टेट, सिटी डाले और अपने आस पास के आधार सेन्टर का पता डालें
|
अब आपको जिस तारीख, जिस समय जाना हो वो समय और तारीख उसमे डालें।

आप Fix Appointment बटन पर क्लिक करें आपकी अपॉइंटमेंट पक्की हो गई है।

अब आपको अपनी अपॉइंटमेंट स्लिप का एक प्रिंट आउट लेकर आपने अपने दिए हुए समय पर आधार सेन्टर पर |
जाएँ।

आधार कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन :

आवेदन कर्ता को यहां पर दिए गए वेबसाइट पर क्लिक करना होगा।

क्लिक करने के बाद आधार कार्ड एप्लीकेशन फॉर्म दिखाई देगा।

इस एप्लीकेशन फॉर्म को डाउनलोड करें।

इसमें जो भी जानकारी दी गई है उसको भरे
इसमें एक फोटो अपलोड करें

सबमिट बटन पर क्लिक करें।

आधार कार्ड बनाने के लिए ऑफलाइन आवेदन

प्यारे दोस्तों यदि आप ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते हैं या आपको करना नहीं आ रहा है। तब भी घबराने की
जरूरत नहीं है।


आप अपने नजदीकी डीसी (DC Office )ऑफिस में जाकर भी अपने आधार कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

या मेरे प्यारे दोस्तों आपके घर के नजदीक भी कई बार आधार कार्ड बनाने वाले आते हैं।

उनके पास जाकर आप अपनी सारी जानकारी देकर तथा अपनी वहां पर फोटो खिंचवाकर भी आधार कार्ड के लिए
अप्लाई कर सकते हैं ।

तब कुछ ही दिनों में आपका आधार कार्ड आज तक पहुंच जाएगा ।

परंतु ध्यान रहे जब भी आप आधार कार्ड बनवाएं अपना नाम, पता, जन्म, तारीख, सन, सब कुछ सही सही बताए।

यदि आप इसमें कोई त्रुटि करते हैं तो आपका आधार कार्ड गलत बन जाएगा ।

और जो फिर आपको मुश्किल पैदा करेगा । इसलिए कृपया अपनी सारी जानकारी सही-सही दें।

इस प्रकार आप ऑफलाइन भी आधार कार्ड बनवा सकते हैं आधार कार्ड एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड

आधार कार्ड संपर्क जानकारी
यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI),

प्लानिंग कमीशन,

गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया (GoI),

३ फ्लोर, टावर II, जीवन भारती बिल्डिंग,

कन्नौघट सर्कस, नई दिल्ली - ११०००१.

अपना ई - आधार प्राप्त करें 

एक बार आधार कार्ड के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज और बायोमेट्रिक डेटा जमा हो जाने के बाद , आधार कार्ड को आपके आवासीय पते पर भेजा जाना चाहिए , इसमें 90 दिन या 3 महीने लग सकते हैं । इस कार्ड को भारतीय डाक के जरिए भेजा जाएगा और आधार कार्ड के लिए आवेदन करने वाले लोगों की संख्या अधिक होने के कारण संबंधित कार्ड धारक तक पहुंचने में 90 दिन से अधिक का समय लग सकता है । 

हालांकि , अगर किसी व्यक्ति को अपने आधार कार्ड की जल्दी जरूरत है , तो वह आधार कार्ड की एक कॉपी डाउनलोड कर सकता है जिसे ई - आधार के रूप में भी जाना जाता है । ई - आधार ऑनलाइन प्राप्त करने के लिए 

आपको इस तरीका का पालन करना होगा : 

यूआईडीएआई ( UIDAI ) की आधार कार्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं । 

एनरोलमेंट न ० या आधार न ० का उपयोग करके फॉर्म भरें । 

यदि आपके पास एनरोलमेंट नंबर है : 

तो नामांकन क्रमांक दर्ज करें । 

आधार रसीद पर्ची में उल्लिखित तिथि और समय दर्ज करें । 

अपना नाम , अपने क्षेत्र का पिन कोड और अपना आधार के साथ रजिस्टरमोबाइल नंबर दर्ज करें । 

यदि आपके पास आपका आधार नंबर है : 

तो उसे अपने नाम , पिन कोड और मोबाइल नंबर के साथ दर्ज करें । 

सभी विवरणों को दर्ज करने के बाद एक ओटीपी ( वन टाइम पासवर्ड ) उत्पन्न होता है जो आधार पत्र के रंगीन संस्करण को डाउनलोड करने में मदद करेगा जो कि आधार कार्ड के समान ही मान्य है । 

घर बैठे लें अपाइंटमेंट 

आधार जारी करने वाली संस्था यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ( UIDAL ) आपको फ्री में ऑनलाइन अपाइंटमेंट लेने की सुविधा देती है । यानी आप घर पर ही आधार कार्ड बनवाने के लिए सेवा केंद्रों पर की अपाइंटमेंट ले सकते हैं । 
आइए जानते हैं कि आप कैसे अपाइंटमेंट ले सकते हैं । 

ऐसे लें अपाइंटमेंट 

ऑनलाइन अपाइंटमेंट लेने के लिए आपको सबसे पहले UIDAI की वेबसाइट https://uidai.gov.in/ पर जाना होगा । 

वेबसाइट पर जाकर आपको ' My Aadhaar ' टेब पर क्लिक करना होगा , जिसके बाद आपको बुक एन अपाइंटमेंट का एक विकल्प मिलेगा । 

इसपर जाने के बाद आपको सिटी लोकेशन का एक और विकल्प मिलेगा , जिसमें से आपको शहर का चयन करना होगा ।

शहर चुनने के बाद 'प्रोसेस्ड टू बुक एन अपाइंटमेंट' पर क्लिक करें।

अब आपके समक्ष एक नया पेज खुलेगा, जिसमें तीन ऑप्शन होंगे- न्यू आधार, आधार अपडेट और मैनेज अपाइंटमेंट
अपनी आवश्यकता के अनुसार आप इनमें से कोई विकल्प चुन सकते हैं।

उचित विकल्प चुनने के बाद आपको रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, कैप्चा कोड और ओटीपी डालना होगा, जिसके बाद
आपकी एप्लीकेशन वेरीफाई होगी। इस दौरान आपको अपाइंटमेंट के लिए टाइम स्लॉट भी चुनना होगा। ये सब करने के
बाद इसे सबमिट कर दें। बता दें कि बुकिंग प्रोसेस पूरी तरह ये मुफ्त है। हालांकि किसी भी सेवा को अपडेट कराने के
लिए 50 रुपये की फीस जमा करनी होगी।

यूआईडीएआई ने दिल्ली, चेन्नई, भोपाल, आगरा, हिसार, विजयवाड़ा और चंडीगढ़ सहित कई जगहों में आधार सेवा केंद्रों
को शुरू किया है।


इसके अतिरिक्त आप मोबाइल आधार एप का भी उपयोग कर सकते हैं, आइए जानते हैं कैसे।

मोबाइल आधार एप का करें इस्तेमाल

यूआईडीएआई के मोबाइल आधार (mAadhaar) एप के जरिए भी अपने काम निपटा सकते हैं। इस एप से जनता को
काफी आसानी होती है क्योंकि इस एप में लोगों को कई आधार संबंधी सेवाएं मिलती हैं। इन सेवाओं में आधार
डाउनलोड करना, उसका स्टेटस चेक करना, आधार रीप्रिंट के लिए ऑर्डर देना और आधार केंद्र लोकेट (पता मालूम
करना) करना आदि शामिल है। एप के जरिए आप बायोमेट्रिक लॉक व अनलॉक करने का विकल्प भी मिलेगा।

इस एप पर सेवाओं के हैं दो सेक्शन

पहला - मेन सर्विस डैशबोर्ड (Main Service Dashboard), जिसमें आपको रीप्रिंट के लिए ऑर्डर, पता बदलने,
ऑफलाइन ई-केवाईसी डाउनलोड करना, क्यूआर कोड स्कैन करना, ई-में बदलना या वेरिफाई करना, आदि सुविधाएं
मिलती हैं।

दूसरा - माई आधार सेक्शन (My Aadhaar Section), जिसमें आपको आधार प्रोफाइन के लिए पर्सनलाइज्ड सेक्शन
मिलता हैं।

एनरोलमेंट नंबर से आधार कार्ड का स्टेटस जानने का तरीका


यूआईडीएआई (UIDAI) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदक अपना आधार कार्ड का स्टेटस/ स्तिथि देख सकते हैं।
यूआईडीएआई(UIDAI) की आधिकारिक वेबसाइट पर आधार कार्ड का स्टेटस देखने के लिए कोई फीस/ शुल्क नहीं लगती।
है। अपने आधार कार्ड के आवेदन का स्टेटस ऑनलाइन देखने के लिए, ये आसान तरीका अपनाएं:

1. यूआईडीएआई(UIDAI) के आधार कार्ड की आधिकारिक वेबसाइट(https://uidai.gov.in/) पर जाएँ

2. अब, आपको अपने आधार के स्टेटस को जानने के लिए अपनी EID (एनरोलमेंट आईडी) की आवश्यकता होगी

3. अपनी EID दर्ज करें आपके नामांकन / अपडेट रसीद के शीर्ष पर उपलब्ध है जो कि 14- डिज़िट एनरोलमेंट नंबर और
14- डिज़िट की तारीख और आपके नामांकन का समय (जो वैकल्पिक है) ।


4. वेरिफिकेशन के लिए 'Captcha Code' दर्ज करें

5. Check Status' पर क्लिक करें

6. आप 'Download Aadhaar' विकल्प पर क्लिक करके ई-आधार डाउनलोड कर सकते हैं


7. अगर आप मोबाइल पर अपना आधार प्राप्त करना चाहते हैं , तो आप ' Get Aadhaar on Mobile ' विकल्प पर क्लिक करें 


एनरोलमेंट नंबर के बिना आधार कार्ड का स्टेटस जानने का तरीका 

अगर आप अपना एनरोलमेंट नंबर भूल गए हैं या एक्नॉलेजमेंट स्लिप खो गई हैं , तो भी आप अपना एनरोलमेंट नंबर पा सकते हैं और फिर एनरोलमेंट नंबर से आधार कार्ड के स्टेटस / स्तिथि जान सकते हैं । यहाँ बताया गया है कि एनरोलमेंट नंबर के बिना | आधार कार्ड आवेदन के स्टेटस को कैसे जानें : 

1. अपना एनरोलमेंट नंबर दोबारा पाने के लिए सबसे पहले https://resident.uidai.gov.in/ पर जाएँ 

2. अपनी जानकारी दोबारा पाने के लिए EID or UID ( Aadhaar ) विकल्प को चुनें 

3. अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP भेजने के लिए अपना नाम , ईमेल , मोबाइल नंबर और सिक्योरिटी कोड डालें 

4. खाली दी गई जगह में OTP डालें और ' Verify OTP ' पर क्लिक करें 

5 . एक बार वेरीफाई होने के बाद , एनरोलमेंट नंबर / आधार नंबर आवेदक के ईमेल आई डी और मोबाइल नंबर पर भेजा | जाता है 

6. इस एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल करके , आवेदक आधार का स्टेटस चेक कर सकता है | 

URN (UIDAI),अपर्डेट रिरकवेस्ट नंबर) द्वारा आधार कार्ड आवेदन का स्टेटस जान

जब कोई आवेदक ऑनलाइन पता अपडेट की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करता है , तो उसे 14 - डिजिट का नंबर प्राप्त होता है जिसे अपडेट रिक्वेस्ट नंबर ( URN ) भी कहा जाता है । यह नंबर आवेदक को उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से भेजा जाता है , जिसका उपयोग उसके पते के अपडेट के स्टेटस को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है । 

आधार कार्ड अपडेट के स्टेटस जानने के लिए , नीचे दिए गए तरीके का पालन करें : 

1. UIDAI की अधिकारिक वेबसाइट पर जाएं . https://ssup.uidai.gov.in/web/guest/check-status 

2. अपना आधार नंबर और URN नंबर डालें 

3. वेरिफिकेशन के लिए ' Captcha Code ' दर्ज करें 

4. अब ' Check Status ' पर क्लिक करें 

5 . अब आपको अपने आधार अपडेट के स्टेटस प्राप्त होगा

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