मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है पढ़िए यह रोचक कहानी

भगवान् मपुंगू , सबसे बड़े देवता ने धरती और आकाश बनाया , दो मनुष्य एक पुरुष और एक स्त्री बनाई ; जिन्हें दिमाग दिया । किंतु अब तक इन दोनों मनुष्यों को उन्होंने हृदय नहीं दिया था । भगवान् मपुंगू के चार बच्चे थे । 

चंद्र , सूर्य , अंधकार और बरसात । उन्होंने चारों को एक साथ बुलाया और कहा , मैं अब निवृत्त होना चाहता हूँ । अतः मनुष्य अब कभी मुझे देख न सकेंगे । मैं अपनी जगह पर एक हृदय को धरती पर भेजूंगा । किंतु जाने से पहले मैं जानना चाहता हूँ 


मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है पढ़िए यह रोचक कहानी


कि तुम लोग क्या - क्या करोगे ? बरसात ने कहा , मैं मूसलाधार पानी बरसाऊँगा और हर चीज को पानी में डुबो दूँगा । नहीं । भगवान् मपुंगू ने कहा , ऐसा हरगिज नहीं करना चाहिए । इन दोनों की तरफ देखो । उन्होंने स्त्री और पुरुष की ओर इशारा किया , क्या ये लोग पानी के भीतर रह सकेंगे ? तुम सूर्य से इस काम में मदद लो ।


जब तुम जरूरत भर का पानी बरसा दो तब सूर्य को काम करने देना । वह अपनी गरमी से उसे सुखा देगा । और तुम किस तरह काम करोगे ? भगवान् मपुंगू ने सूर्य मैं चाहता हूँ , मैं इतना तेज चमकूँ कि मेरी गरमी से सब से पूछा । जल जाएँ ! उनके दूसरे पुत्र सूर्य ने कहा नहीं । भगवान् मपुंगू ने कहा , 


यह होगा तो फिर मेरे बनाए इन मनुष्यों को भोजन कैसे मिलेगा ? देखो , जब अपनी गरमी से सबकुछ झुलसाने लगोगे तब बरसात को मौका देना । वह पानी बरसाकर राहत देगा और फल अनाज उगने में सहायता करेगा । और तुम , अंधकार ! तुम्हारे कार्यक्रम की क्या रूपरेखा है ? भगवान् ने अंधकार से पूछा । मैं हमेशा - हमेशा के लिए राज्य करना चाहता हूँ । 


अंधकार ने उत्तर दिया । दयालु बनो । भगवान् ने सौम्य स्वर में कहा , क्या तुम मेरी इस अद्भुत रचना को खत्म कर देना चाहते हो ? क्या तुम चाहते हो कि शेर , चीते , सर्प सब अँधेरे में घूमते रहें और मेरी बनाई दुनिया न देख सकें ? चाँद को भी कुछ करने का मौका दो । * उसे धरती पर चमकने दो । जब वह चौथाई रह जाए तब पुनः तुम अपना साम्राज्य फैला सकते हो । 


मुझे काफी देर हो गई है । अब मुझे जाना चाहिए । और भगवान् मपुंगू अंतर्धान हो गए । कुछ समय के बाद हृदय एक पतली सी झिल्ली से आवृत्त उनके पास आया । वह रो रहा था । उसने सूर्य , चंद्रमा , अंधकार और बरसात से पूछा , हमारे पिता भगवान् मपुंगू कहाँ हैं ? पिताजी चले गए ।


उन्होंने कहा , हम जानते भी नहीं हैं कि वे कहाँ गए ! हाय ! मेरी कितनी इच्छा थी कि उनके साथ उनमें लीन हो जाऊँ । किंतु ... खैर , जब तक वे नहीं मिलते , मैं आदमी में प्रवेश करूंगा और उसके माध्यम से पीढ़ी - दर - पीढ़ी ईश्वर को खोजूँगा । हृदय ने कहा । और यही हुआ । मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है , जो आज भी ईश्वर को चाहता है । 


शिक्षा : ईश्वर हर किसी में है ।

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