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Friday, 4 November 2022

Dev Uthani Ekadashi 2022: देवउठनी एकादशी के दिन क्या करें और क्या नहीं

Dev Uthani Ekadashi 2022 सभी 24 एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी मानी जाती है । इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी , देव प्रबोधिनी एकादशी और डिठवन एकादशी के नाम भी जाना जाता है । ऐसे में जगत के पालनहार के जागते ही 4 महीनों से रुके हुए सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर से से शुरू हो जाएंगे । धार्मिक मान्यता है कि सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली इस एकादशी का व्रत करने वालों को स्वर्ग और बैकुंठ की प्राप्ति होती है । हालांकि इस दिन कुछ बातों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी होता है ।


Dev Uthani Ekadashi 2022



 Dev Uthani Ekadashi 2022 व्रत में क्या करें ?


  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें ।

  • मान्यता के अनुसार , देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक अवश्य जलाना चाहिए ।


  • देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन भी करना चाहिए ।


  • इस दिन निर्जला व्रत रखना चाहिए । 


  • साथ ही देवउठनी एकादशी के दिन किसी गरीब और गाय को भोजन अवश्य कराना चाहिए ।

 

Dev Uthani Ekadashi 2022 को क्या न करें 


  • हिंदू शास्त्रों के अनुसार , एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए ।


  • देवउठनी एकादशी वाले दिन पर किसी अन्य के द्वारा दिया गया भोजन नहीं करना चाहिए ।


  • साथ ही एकादशी पर मन में किसी के प्रति विकार नहीं उत्पन्न करना चाहिए ।


  • देवउठनी एकादशी पर गोभी , पालक , शलजम आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए ।


  • देवउठनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए ।


  • एकादशी वाले दिन पर बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए ।


  • एकादशी वाले दिन पर संयम और सरल जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए । 


  • इस दिन कम से कम बोलने की किसी कोशिश करनी चाहिए । साथ ही भूल से भी किसी को कड़वी बातें नहीं बोलनी चाहिए । 

 

Dev Uthani Ekadashi 2022 उपाय


देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें । ऐसा करने से जगत के पालनहार प्रसन्न होते हैं और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है ।


देवउठनी एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें । ऐसा करने से जीवन में आपको समस्त सुखों की प्राप्ति होगी । स्नान करने के बाद गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें माना जाता है इससे स्वास्थ्य अच्छा होता है ।


Dev Uthani Ekadashi 2022 के दिन पीले रंग का वस्त्र , पीला फल व पीला अनाज भगवान विष्णु को अर्पण करें । बाद में ये सभी चीजें गरीबों व जरूरतमंदों में दान कर दें । मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा आप पर बनी रहेगी 


धन वृद्धि के लिए देवउठनी एकादशी के दिन विष्णु मंदिर में सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं । ध्यान रहे भोग में तुलसी के पत्ते जरूर डालें । इससे भगवान विष्णु जल्दी ही प्रसन्न होते हैं और धन की तिजोरी भरने लगती है ।


कहा जाता है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है । ऐसे में देवउठनी एकादशी के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं । शाम को पेड़ के नीचे दीपक लगाएं । इस उपाय को करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है 


शिव पुराण के अनुसार देवउठनी का महत्व


शिव पुरा के अनुसार दैत्यराज शंखासुर से आंतक से सभी देवी - देवता बहुत परेशान हो चुके थे , तब सभी एक साथ मिलकर भगवान विष्णु और भगवान शंकर के पास इस राक्षस के अंत करने की प्रार्थना करने के लिए उनके समक्ष पहुंचे । फिर भगवान विष्णु और दैत्य शंखासुर के बीच कई दिनों तक भयानक युद्ध चला और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु ने शंखासुर को वध कर दिया था । लंबे समय तक दोनों के बीच चले युद्ध के कारण भगवान विष्णु काफी थक चुके थे । तब वह क्षीरसागर में आकर विश्राम करने लगे और फिर सो गए । इस दौरान सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव ने अपने कंधों पर ले लिया था । चार महीने की योग निद्रा के बाद भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं । भगवान विष्णु के जागने पर भगवान शंकर समेत सभी देवी - देवताओं ने उनकी पूजा की और सृष्टि के संचालन का कार्यभार दोबार से उन्हें सौंप दिया । इस कारण से हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव प्रबोधिनी , देवोत्थान और देवउठनी के नाम से जाना जाता है ।


तुलसी- शालिग्राम विवाह का महत्व


कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह करने का महत्व होता है । इस दिन स्त्रियां एकादशी को भगवान विष्णु के रूप शालिग्राम एवं विष्णुप्रिया तुलसी का विवाह संपन्न करवाती हैं ।


पूर्ण रीति - रिवाज़ से तुलसी वृक्ष से शालिग्राम के फेरे एक सुन्दर मंडप के नीचे किए जाते हैं । विवाह में कई गीत , भजन व तुलसी नामाष्टक सहित विष्णुसहस्त्रनाम के पाठ किए जाने का विधान है । 


शास्त्रों के अनुसार तुलसी- शालिग्राम विवाह कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है , दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है । इसके अलावा तुलसी विवाह विधि - विधान से संपन्न कराने वाले भक्तों को अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । इससे वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है ।


श्री हरि के भोग में तुलसी दल का होना अनिवार्य है , भगवान की माला और चरणों में तुलसी चढ़ाई जाती है ।


माना जाता है कि तुलसी विवाह करने से कन्या दान के समान पुण्य प्राप्त होता है । यदि आपने आज तक कन्यादान नहीं किया हो , तो तुलसी विवाह करके आप इस पुण्य को अर्जित कर सकते हैं ।

Thursday, 20 October 2022

Laughing Buddha को इस दिशा में रखें तो संपत्ति में वृद्धि

धन की पोटली अपने कांधे पर टांगे Laughing Buddha किसी भी घर या ऑफिस के लिए शुभ माने गए हैं । इन्हें रखने से पैसों से जुड़ी हर परेशानी खत्म होने लगती है और कभी पैसों की तंगी नहीं होती । धन की पोटली धन भंडार का प्रतीक है । ऐसे लॉफिंग बुद्धा को घर लेकर आना यानी उनके पीछे - पीछे धन - संपदा को भी आने का रास्ता दिखाना है । 

Laughing Buddha
Laughing Buddha



Laughing Buddha को सुख , प्रचुरता , संतोष और कल्याण का प्रतीक माना जाता है । लाफिंग बुद्धा की मूर्तियों को शुभ माना जाता है और सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य के लिए इन्हें अक्सर घरों , कार्यालयों , होटलों और रेस्तरां में रखा जाता है । दोनों हाथ ऊपर किए हुए Laughing Buddha सौभाग्य का प्रतीक हैं वह खुशहाली लेकर आते हैं . उनकी मूर्ति से विश्वास में बढ़ोतरी होती है । 


Laughing Buddha


धन की पोटली अपने कांधे पर टांगे Laughing Buddha किसी भी घर या ऑफिस के लिए शुभ माने गए हैं । इन्हें रखने से पैसों से जुड़ी हर परेशानी खत्म होने लगती है और कभी पैसों की तंगी नहीं होती । पूर्व , उगते सूरज की दिशा , जहां Laughing Buddha रखा जाना चाहिए । 

इसे परिवार के लिए सौभाग्य का स्थान कहा जाता है । परिवार में सुख - समृद्धि लाने के लिए इस दिशा में मूर्ति स्थापित करें । यदि मूर्ति को दक्षिण - पूर्व दिशा में रखा जाए तो इससे परिवार की संपत्ति में वृद्धि होती है ।

Laughing Buddha के बारे में बहुत सारी बातें प्रचलित हैं । आप उदास रहते हैं , आर्थिक बोझ तले दबे हुए हैं , घर में उदासी जैसी स्थिति बनी रहती है , तो लाफिंग बुद्धा को अपने घर लाकर इन समस्याओं का समाधान पा सकते हैं । 


Laughing Buddha
Laughing Buddha



Laughing Buddha की मूर्ति सुख , संपदा एवं प्रगति का प्रतीक माना जाता है । घर में इसके होने से संपन्नता , सफलता आती है । लाफिंग बुद्धा की मूर्ति सुख , संपदा एवं प्रगति का प्रतीक माना जाता है । घर में इसके होने से संपन्नता , सफलता आती है । 

Laughing Buddha की मूर्ति मकान , व्यापार स्थल , लॉबी या फिर बैठक कक्ष में होनी चाहिए । लेकिन ध्यान रहे , यह जमीन से ढाई फीट ऊपर एवं मुख्य दरवाजे के सामने होनी चाहिए । लाफिंग बुद्धा की मूर्ति मकान , व्यापार स्थल , लॉबी या फिर बैठक कक्ष में होनी चाहिए । लेकिन ध्यान रहे , यह जमीन से ढाई फीट ऊपर एवं मुख्य दरवाजे के सामने होनी चाहिए । 


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बुद्धा के हंसते हुए चेहरे को खुशहाली और संपन्नता का प्रतीक माना गया है । फेंगशुई के नियम के अनुसार लाफिंग बुद्धा को अपने घर में दक्षिण पूर्व दिशा में रखें तो इस दिशा की सकारात्मक उर्जा बढ़ जाती है जो धन औ सुख को आकर्षित करती है । घर में रहने वालों की आमदनी बढ़ती है । नौकरी व्यवसाय आपके विरोधियों से आप परेशान हैं तो इसमें भी यह राहत दिलाता है ।

सनातन धर्म में जहां भगवान विष्णु के कच्छप अवतार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है । वहीं कच्छप यानि कछुए की कई प्रतिमाओं का उपयोग पूराने समय से आज तक हमारे यहां शुभता के लिए किया जाता है । इसी के तहत कछुए का प्रयोग प्राचीन समय से ही वास्तु उपाय के रूप में किया जाता रहा है । प्राचीनतम मंदिरों में हमें असीम शांति अनुभव होती है । 

माना जाता है कि ऐसा कछुआ व्यर्थ की भागदौड़ व अनावश्यक प्रयासों से बचाते हुए यह जीवन की सार्थकता के साथ - साथ सुरक्षा भी देता है । कछुआ एक प्रभावशाली यंत्र है , जिससे वास्तु दोष का निवारण होता है और खुशहाली आती है । वास्तु और फेंगशुई में स्फटिक निर्मित कछुआ घर में रखना ज्यादा असरकारी माना जाता है 

इसे घर में रखने से कामयाबी के साथ - साथ धन - दौलत का भी समावेश होता है । अगर आप काफी समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और कई उपाय करने के बाद भी आपको कोई विकल्प नहीं मिल रहा है तो आप घर में स्फटिक से बना हुआ कछुआ रख सकते है । इसे घर की उत्तर दिशा में रखें और मुंह अंदर की तरफ रहे । यदि आप व्यवसायी हैं , तो अपने प्रतिष्ठान की उत्तर दिशा में वास्तु कछुआ रखें , ऐसा करने से व्यापार में धन लाभ और सफलता मिलती है रुके हुए काम जल्दी होने लगते हैं ।

वहीं पीतल , चांदी , तांबा या अष्ट धातु से बना हुआ कछुआ यानि धातु का कछुआ घर या व्यवसायिक स्थल पर लगाना शुभ माना गया है । इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है व वास्तुदोष भी दूर होता है । घर में धातु का कछुआ रखने से , कई समस्याओं के समाधान में मदद मिलती है । 

कड़ी मेहनत करने के बावजूद भी अगर आपको कैरियर में सफलता नहीं मिल रही है तो आपको अपने घर की उत्तर दिशा में धातु से बना हुआ कछुआ रखना चाहिए । इस दिशा में धातु का कछुआ रखने से घर का वातावरण सकारात्मक रहता है , परिवार के सदस्यों का मूड भी अच्छा रहता है । 

कछुए का प्रयोग प्राचीन समय से ही वास्तु उपाय के रूप में किया जाता रहा है । प्राचीनतम मंदिरों में हमें असीम शांति अनुभव होती है , उसका मुख्य कारण मंदिर के मध्य में कछुए की स्थापना है । कहा जाता है कि इसको जहां भी रखा जाता है , वहां सुख - समृद्धि - शांति आती है । आजकल बहुत से लोग घर में कछुए की प्रतिमा रखते हैं । 

मान्यता है कि कछुए के प्रतीक को घर में रखने से आर्थिक उन्नति होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है , जिससे घर में रहने वाले सदस्यों की सेहत अच्छी रहती है ।

Monday, 17 October 2022

deepawali कब है जानें तिथि शुभ मुहूर्त और लक्ष्मी गणेश पूजन

प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह में अमावस्या तिथि को deepawali का त्योहार मनाया जाता है । पूरे भारत में इस पर्व का अलग ही हर्ष और उल्लास देखने को मिलता है । इस दिन पूरा देश दीये को रोशनी से जगमगा उठता है । हिंदू धर्म में दिवाली को सुख - समृद्धि प्रदान करने वाला त्योहार माना जाता है । धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर पर पधारती हैं और उन्हें धन - धान्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं ।

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साथ ही कहा जाता है कि दिवाली के दिन ही प्रभु श्रीराम लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करके अयोध्या लौटे थे । 14 वर्ष का वनवास पूरा कर भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में लोगों ने पूरे अयोध्या को दीयों को रोशनी से सजा दिया था । तभी से पूरे देश में दिवाली मनाई जाती है । इस दिन लोग दीपक जलाकर खुशियां मनाते हैं ।

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deepawali पर शुभ मुहूर्त कब है  


 इस साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 24 और 25 अक्टूबर दोनों दिन पड़ रही है । लेकिन 25 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल से पहले ही समाप्त हो रही है । वहीं 24 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होगी । 24 अक्टूबर को निशित काल में भी अमावस्या तिथि होगी । इसलिए इस साल 24 अक्टूबर को ही पूरे देश में दीवाली का पर्व मनाया जाएगा ।


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deepawali पर लक्ष्मी - गणेश पूजन विधि


दिवाली पर शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी - गणेश की पूजा विधि पूर्वक की जाती है । पहले कलश को तिलक लगाकर पूजा आरम्भ करें । इसके बाद अपने हाथ में फूल और चावल लेकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का ध्यान करें । ध्यान के पश्चात भगवान श्रीगणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर फूल और अक्षत अर्पण करें । फिर दोनों प्रतिमाओं को चौकी से उठाकर एक थाली में रखें और दूध , दही , शहद , तुलसी और गंगाजल के मिश्रण से स्नान कराएं । इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराकर वापस चौकी पर विराजित कर दें । 

स्नान कराने के उपरांत लक्ष्मी - गणेश की प्रतिमा को टीका लगाएं । माता लक्ष्मी और गणेश जी को हार पहनाएं । इसके बाद लक्ष्मी गणेश जी के सामने बताशे , मिठाइयां फल , पैसे और सोने के आभूषण रखें । फिर पूरा परिवार मिलकर गणेश जी और लक्ष्मी माता की कथा सुनें और फिर मां लक्ष्मी की आरती उतारें ।


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दिवाली पूजा के दौरान क्या करे


deepawali के दिन पूजा क्षेत्र को हमेशा उत्तर - पूर्व दिशा में स्थापित करें और पूजा करते समय परिवार के सभी सदस्यों को उत्तर की ओर मुंह करके बैठना चाहिए ।

  • मुख्य पूजा का दीया देसी घी से भरें ।
  • दीयों की संख्या 11 , 21 , 51 रखें ।
  • दिवाली की रात में अपने घर के दक्षिण - पूर्व कोने में एक सरसों के तेल का दीपक जलाकर रखें । 
  • पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करें , जिन्हें भारतीय परंपरा में विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है ।


deepawali पूजा के दिन क्या न करें 


  • अक्सर लोग इस दिन जुआ खेलते हैं , जबकि ये गलत है । इस दिन जुआ खेलने से बचना चाहिए ।
  • इस दिन शराब पीने और मांसाहारी भोजन लेने से बचें । 
  • दीये को रात भर जलाने के लिए पूजा घर को रात में खाली न छोड़ें ।
  • भगवान गणेश की ऐसी मूर्ति न रखें , जिसकी सूंड दाहिनी ओर हो ।
  • घर के अंदर आतिशबाजी या फुलझड़ी का प्रयोग करें ।

Sunday, 16 October 2022

Hanuman जी को किसका अवतार माना गया है Hanuman जी का असली नाम

राज्याभिषेक के पश्चात श्रीराम ने कौसल राज्य की जनता को एक भारी दावत दी । उस दावत के लिए जो सामग्री चाहिए थी और जिन - जिन प्रबंधों की आवश्यकता थी , उसका सारा आयोजन Hanuman जी ने ही किया था । एक क्षण की भी उन्हें फुरसत नहीं थी । उन्होंने राम के इस प्रबंध को फसल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी ।


Hanuman


सीता ने देखा कि हनुमान परिश्रम कर रहा है । उन पर उनका प्रेम पुत्र - वात्सल्य जैसा था । वहीं प्रथम था , जिसने लंका में उनको ढूंढ निकाला था । उन्होंने हनुमान जी को अपने पास बुलाया और कहा - पुत्र हनुमान ! सुबह से एक क्षण का भी विश्राम किए बिना परिश्रम कर रहे हो । भोजन का समय हो गया है । अतिथियों के सत्कार में कोई त्रुति न आए , इसकी देखभाल की जिम्मेदारी तुम्हीं पर है । इसलिए अच्छा यही होगा कि उनसे पहले तुम भोजन कर लो ।

सीता की बात सुनकर हनुमान जी सीता के पीछे - पीछे रसोई घर में चले गए । सीता ने पत्तल बिछाकर खाना परोसना शुरू कर दिया । जो - जो वह परोसती , हनुमान जी तक्षण ही उसे निगल जाते । यह क्रम थोड़ी देर तक चलता रहा और देखते ही देखते हजारों अतिथियों के लिए पकाई गई भोजन सामग्री समाप्त हो गई । यह देखकर सीता आश्चर्य में डूब गई और दौड़ती हुई राम के पास जाकर उन्हें सब कुछ बता दिया ।


Hanuman


राम ने हंसते हुए कहा- तुमने हनुमान को क्या समझ रखा है ? परमशिव इस रूप में अवतरित हुआ है । उसे कैसे संतुष्ट करना है , यह तुम्हारी शक्ति पर आधारित है । इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता । श्रीराम की बात सुनकर सीता रसोई घर में वापस आईं और हनुमान जी के पीछे खड़ी हो गई । वह मन ही - मन कहने लगीं - परमेश्वर ! मैं जान गई हूं कि तुम कौन हो ? कम -से - कम अब तुम अपनी भूख नहीं त्यागोगे तो हमारी मर्यादा मिट्टी में मिल जाएगी । प्रभु , मेरी रक्षा करो । यह कहकर सीता ने पंघाक्षरी मंत्र का सौ बार पठन किया ।

दूसरे ही क्षण हनुमान जी ने संतृप्ति से डकार ली । सीता उनके आगे आई और बोलीं- पुत्र और परोसू ? नहीं माते ! नहीं ! पेट भर गया है । यह कहकर हनुमान जी रसोई घर से बाहर निकल गए । उसके बाद सीता ने देवी अन्नपूर्णा का स्मरण किया । देवी ने पहले की ही तरह सब बर्तनों में पदार्थों से भर दिया । नागरिक और वानर खाने में जुट गए । वानर पंक्ति को कोने में बैठा एक छोकरा वानर आंवले को बड़े आश्चर्य से देख रहा था । उसने अपनी उंगलियों से उसे दबाया तो उसका बीज ध्वनि करता हुआ , छलांग मारता ऊपर उठा । बालक वानर ने उसे देखते हुए कहा- अरे , तू क्या समझता है कि तुझे ही छलांग मारनी आती है । देखा मेरा कौशल !

यह कहकर वह वानर उठ खड़ा हुआ और ऊपर उड़ा । उसे देखकर एक और वानर उससे भी ऊपर उड़ा । तीसरा भी यह देखता रहा और बड़े उत्साह से उससे भी ऊपर उड़ा । इस प्रकार वानर समूह एक - दूसरे से अधिक अंतरिक्ष में उड़ने लगे । अंगद , नल , नील और सुग्रीव भी उड़े । हनुमान जी ने सोचा कि शायद राजा की यह आज्ञा होगी । वह भी उड़े । उन्होंने केवल औपचारिक छलांग मारी ।


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वहां आए हुए राम ने वानरों के इस कोलाहल को देखा और हनुमान जी से पूछा- हनुमान जी ! जबकि सब वानर आकाश में उड़ रहे हैं , तब तुम केवल एक छलांग मारकर चुप क्यों हो गए ? हनुमान जी ने विनयपूर्वक कहा- प्रभु ! इतने महान वीरों के सामने मेरी क्या हस्ती ? हनुमान जी की बात सुनकर जांबवंत आगे आया और बोला- प्रभु ! जब तक कोई दूसरा नहीं बताता , तब तक अपनी शक्ति सामर्थ्य से हनुमान जी अनभिज्ञ हैं । 

 यह सुनकर श्रीराम ने एक श्वेत कमल Hanuman जी को देते हुए कहा- हमारे वंश के मूल कारक सूर्य भगवान को यह श्वेत कमल समर्पित करना है । सूर्य को श्वेत पद्मधारी कहा जाता है । उन तक यह पहुंचाने की शक्ति केवल तुम्ही में है । हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम की आज्ञा का पालन किया और एक छलांग में आकाश में उड़ गए । आकाश में पहुंचकर उन्होंने सूर्य के रथ को पकड़ लिया । उसने सूर्य भगवान से कहा- गुरुदेव ! श्रीराम ने इस श्वेत कमल को आपको समर्पित करने के लिए कहा है । यह कहकर उन्होंने वह श्वेत कमल के चरणों में रख दिया । 

सूर्य भगवान ने Hanuman जी को चिरंजीवी कहकर आशीर्वाद दिया और फिर अपने हाथ में सजे एक श्वेत पद्म को उन्हें देते हुए कहा- यह पद्म श्रीराम को दे देना । इसके प्रभाव से राम के राज्य पालन के काल में देश सुसंपन्न रहेगा । सूर्य भगवान से अनुमति लेकर हनुमान जी श्वेत पद्म लेकर श्रीराम के पास लौट आए । श्रीराम ने हनुमान जी को गले लगाया और आशीर्वाद दिया । आशीर्वाद पाकर हनुमान जी गंधमादन पर्वत पर उड़ चले और वहां के प्रशांत वातावरण में राम नाम के स्मरण में अपना जीवन सार्थक करने लगे ।

Saturday, 15 October 2022

Premature death से रक्षा पाने के लिए इस रुद्राक्ष

Premature death से रक्षा के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष सुरक्षित होता है और यह पुरुषों , महिलाओं और बच्चों , हर किसी के लिए अच्छा है । यह समान्य खुशहाली , स्वास्थ्य और स्वतंत्रता के लिए है । यह आपके ब्लड प्रेशर को कम करता है , आपकी तंत्रिकाओं को शांत करता है और स्नायु तंत्र में एक तरह की शांति और सतर्कता लाता है

Premature death


यह जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता पाने में मदद करता है और ज्ञान , धन , शक्ति और प्रसिद्धि पाने में मदद करता है । हालांकि , इसमें पंचमुखी रुद्राक्ष का महत्व ज्यादा है । धन और समृद्धि पाने के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की सलाह दी जाती है ।

माना जाता है कि इसको धारण करने से भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद बना रहता है । इसे धारण करने वाले को विशेष सावधानियां बरतने की जरुरत होती है । इसको पहनने से हृदय संबंधित बीमारियां , तनाव , चिंता , रक्त दबाव आदि को नियंत्रित करने में मदद मिलती है । मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए इस रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं । धारणकर्ता को विभिन्न विषयों का ज्ञान अर्जित करने में मदद मिलती है ।


Premature death


Premature death 2 के लिए भी इस रुद्राक्ष को पहन सकते हैं । पंचमुखी रुद्राक्ष साक्षात् शिव स्वरूप है । यह रुद्राक्ष नरहत्या के दोषों को दूर करने में सक्षम है । इस रुद्राक्ष को धारण करने से बृहस्पति के अशुभ फल समाप्त हो जाते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है । ज्ञान और आध्यात्मिक विकास के लिए इस रुदाक्ष को धारण करना चाहिए ।

इस रुद्राक्ष को धारण करने से पहले इसे गंगा जल या कच्चे दूध से शुद्ध कर लीजिए । उसके बाद धूप , दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने की सलाह दी जाती है । इसके बाद ' ॐ ह्रीं नम : ' मंत्र का 108 बार जाप करें ।

पंचमुखी रुद्राक्ष सर्वगुणों से संपन्न है इसके धारण करने से संतान एवं धन सुख प्राप्त होता है । वस्तुतः यह रुद्राक्ष सभी रुद्राक्षों में सर्वाधिक शुभ तथा पुण्य प्रदान करनेवाला माना गया है । इसे धारण करने से शीघ्र ही निर्धनता , दाम्पत्य सुख में कमी , जांघ व कान के रोग , मधुमेह जैसे रोगों का निवारण होता है । पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने वालों को सुख , शांति तथा प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है । ह्रदय रोगियों के लिए तो यह रामबाण ही है । इससे आत्मविश्वास , मनोबल तथा ईश्वर के प्रति श्रद्धा बढ़ती है ।


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इस यंत्र की स्थापना से आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है । मात्र इस यंत्र की स्थापना से ही घर के सभी वास्तु दोष दूर होते हैं । बच्चों की शिक्षा के स्थान पर श्री यंत्र रखने से उनमें एकाग्रता बढ़ती है । तांबे का श्री यंत्र रखने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी होती है ।

कहा जाता है कि श्रीयंत्र की पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है इसलिए लोग अपने घर में श्रीयंत्र की स्थापना करके पूजा और अराधना करते हैं । यदि विधि विधान के साथ श्रीयंत्र की पूजा की जाती है वहां सदैव सुख संपत्ति , सौभाग्य और ऐश्वर्य बना रहता है ।

धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रीयंत्र की पूजा बहुत प्रभावशाली मानी गई है । कहा जाता है कि श्रीयंत्र की पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है इसलिए लोग अपने घर में श्रीयंत्र की स्थापना करके पूजा और अराधना करते हैं ।

यदि विधि - विधान के साथ श्रीयंत्र की पूजा की जाती है वहां सदैव सुख - संपत्ति , सौभाग्य और ऐश्वर्य बना रहता है । यदि आपने अपने घर में श्रीयंत्र की स्थापना की है या करने जा रहे हैं तो इससे संबंधित नियमों का पालन करना भी कुछ बेहद जरूरी है । यदि इन बातों को ध्यान में न रखा जाए तो श्रीयंत्र पूजा करने का उचित फल प्राप्त नहीं होता है ।

सनातन धर्म में शुभ मुहूर्त का बहुत महत्व होता है । शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य से शुभ फल की प्राप्ति होती है , इसलिए कोई भी कार्य करने से पहले मुहूर्त अवश्य देखा जाता है । यदि आप अपने घर में श्री यंत्र स्थापित कर रहे हैं तो किसी योग्य ज्योतिषी से शुभ मुहुर्त की जानकारी अवश्य ले

अगर घर में श्रीयंत्र रख रहे हैं तो उसे भी पूजा स्थान में रखें और देव समान ही नियमित रूप से पूजा करें । शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के साथ श्री यंत्र की पूजा अवश्य करें । इस बात का ध्यान रखें कि एक बार श्री यंत्र को स्थापित करने के बाद रोजाना उसकी पूजा जरूर करनी चाहिए । इसकी पूजा न करने से आपको कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है इसके अलावा इसके नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकते हैं ।

Premature death से रक्षा कोई भी यंत्र आकृतियों , चिन्हों और अंको को उकेरकर बनाया जाता है , किसी भी यंत्र का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए उसका सही तरह से बना हुआ होना आवश्यक है । यदि आप श्रीयंत्र को घर में स्थापित कर रहे हैं तो भलभांति जांच लें कि श्रीयंत्र सही बना हो , गलत श्रीयंत्र की पूजा करने से कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है ।


FAQ


7 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि

किसी बी रूद्राक्ष में जो धारियां बनी होती है उन धारियो के मुख में जाना जाता है किसी रुद्राक्ष में अगर दो धारियां बनी है तो उसे दो मुखी ओर 7 धारियां बनी है तो 7 मुखी होता है 7 मुखी रूद्राक्ष के स्वामी शनिदेव होते है शनिदेव से सम्बंदित समस्या जिनको चल रही होती है बे 7 मुखी रूद्राक्ष पहन सकते है सप्तऋषि मंडल का इसको स्वरूप मानते है ओर इस रूद्राक्ष में सात हॉर्स जितनी ताकत होती है लकशमी प्राप्ति में ये सहायक माना जाता है नोकरी ओर व्यापार में बी महत्बपूर्ण होता है

Friday, 14 October 2022

रात को सोने से पहले करें ये 5 काम | स्किन हमेशा ग्लो करेगी



रात को सोने से पहले दिन भर भागदौड़ की वजह से स्किन रूटीन में ज्यादातर लोग ध्यान नहीं दे पाते , लेकिन अगर रात को सोते समय ही कुछ काम कर लिया जाए तो स्किन के लिए काफी फायदा हो सकता है । स्किन एक्सपर्ट्स की मानें तो त्वचा से जुड़ी तमाम परेशानियों से हमेशा दूर रहना चाहते हो तो आपको बिस्तर पर जाने से पहले ये 5 काम करने होंगे

रात को सोने से पहले

 

रात को सोने से पहले करें ये 5 काम


  • पानी से चेहरा धोना जरूरी

त्वचा की देखभाल के लिए रात को सोने से पहले कुछ बातों को अमल करना जरूरी होता है और उसमें सबसे पहले आता है साफ पानी से चेहरे को धोना । रात को सोने से पहले आपको चेहरे को साफ पानी से धोना चाहिए । क्योंकि स्किन की अशुद्धियों को दूर करने के लिए पानी काफी आवश्यक होता है । रात को सोने से पहले चेहरा धोने से धूल निकल जाती है ।

  • हर्बल फेस मास्क का यूज करें


रात को सोने से पहले चेहरे पर अगर आप हर्बल फेस मास्क लगाते हैं तो स्किन को स्वस्थ और पौषक रख सकते हैं । हर्बल फेस मास्क से स्किन में खोए हुए पोषक तत्वों के अलावा नमी की भरपाई हो जाती है , जो आपकी स्किन के लिए हर प्रकार से उपयुक्त है । आप सोने से पहले , एलोवेरा , मुल्तानी , खीरे या चंदन का पाउडर लगा सकती हैं ।

  • स्किन को मॉइस्चराइज करना जरूरी

अगर आपकी त्वचा रूखी हो गई है तो सोने से पहले फेस के साथ पूरे शरीर पर क्रीम , लोशन या नारियल तेल का प्रयोग करें , इससे स्किन पर नमी आ सकती है । इसे लगाकर सोने से त्वचा में नमी बनी रहेगी और समय से पहले हो रही झुर्रिया भी ठीक हो जाएंगी ।


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  • बालों की मालिश करना जरूरी

स्किन के साथ - साथ आप रात को सोने से पहले बालों की भी मसाज कर सकती हैं । ऐसा करने से आपकी पूरे दिन की थकान मिट जाएगी और आप गहरी नींद सो पाएंगी । गहरी नींद सोने के कारण आपकी स्किन ग्लो करने लगेगी ।

  • आंखों की इस तरह करें देखभाल

रात को सोने से पहले आंखों की सतह का हिस्सा काफी सबसे संवेदनशील है इसलिए इसकी अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत ज्यादा होती है । आंखों के आस - पास की त्वचा पर हो रहे काले दागों को दूर करने के साथ ही झुर्रियों को दूर करने के लिए आंखों की क्रीम का इस्तेमाल करना काफी जरूरी होता है , इसलिए रात को सोने से पहले आंखों के नीचे क्रीम को लगाना ना भूलें ।

Tuesday, 11 October 2022

बाप बेटी के प्यार की अद्भुत दास्तान आपलोग इसे जरुर पढ़े

 

बाप बेटी के प्यार की अद्भुत दास्तान आपलोग इसे जरुर पढ़े


इस फोटो को देखकर आप सबके मन मे तरह तरह के विचार आयेंगे, लेकिन इस फोटो की सच्चाई जानकर आपकी आँखो मे आँसू आ जायेंगे...!

ये फोटो यूरोप के एक पेंटर "मुरीलो" ने बनाया है! यूरोप के एक देश मे एक आदमी को पाव रोटी चुराने के इल्ज़ाम में भूखे मरने की सजा मिली,उसे एक जेल मे बंद किया गया, सजा ऐसी थी की जब तक उसकी मौत नही हो जाती तब तक उसे भूखा रखा जाय! 


उसकी बेटी ने अपने पिता से मिलने के लिये सरकार से अनुरोध किया कि वह हर रोज अपने पिता से मिलेगी! उसे मिलने की इजाजत दे दी गयी, मिलने से पहले उसकी तलाशी ली जाती कि वह कोई खाने का सामान न ले जा सके।उसे अपने पिता की हालत देखी नही गयी! 


वो अपने पिता को जिंदा रखने के लिये अपना दूध पिलाने लगी! जब कई दिन बीत जाने पर भी वो आदमी नही मरा तो पहरेदारों को शक हो गया और उन्होंने उस लड़की को अपने पिता को अपना दुध पिलाते पकड़ लिया, उस पर मुकदमा चला, और सरकार ने कानून से हटकर भावनात्मक फैसला सुनाया, उन दोनो को रिहा कर दिया गया।


ये पेंटिंग युरोप की सबसे महँगी पेंटिंग है...!!


नारी कोई भी रूप में हो चाहे माँ हो चाहे पत्नी हो चाहे बहन हो चाहे बेटी...हर रूप में वात्सल्य त्याग और ममता की मूरत है। नारी का सम्मान करो


Seeing this photo, all kinds of thoughts will come in your mind, but knowing the truth of this photo will bring tears to your eyes...!


 This photo was made by a painter from Europe "Murillo"!  In a European country, a man was sentenced to starvation for stealing a loaf of bread, he was imprisoned in a prison, the punishment was such that he should be starved until he died!



 Her daughter requested the government to meet her father that she would meet her father everyday!  He was allowed to meet, before being found he was searched so that he could not take any food items. He did not see his father's condition!



 She started feeding her milk to keep her father alive!  When the man did not die even after several days, the guards became suspicious and they caught the girl feeding her father to her father, she was prosecuted, and the government gave an emotional verdict out of law, both of them were released.  been done.



 This painting is the most expensive painting in Europe...!!



 Whether a woman is in any form, whether she is a mother, whether she is a wife or a sister, or a daughter, in every form, love is an idol of sacrifice and love.  respect women

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